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"देहरादून में छिपी महिला", राहुल गांधी SIR विवाद में किस महिला का जिक्र कर रहे हैं? 
राहुल गांधी SIR विवाद के बीच 'देहरादून में छिपी महिला' पर भी निशाना साध रहे हैं

"देहरादून में छिपी महिला", राहुल गांधी SIR विवाद में किस महिला का जिक्र कर रहे हैं? 

लेखन आबिद खान
Oct 14, 2026
03:49 pm

क्या है खबर?

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी कथित वोट चोरी को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर हमलावर हैं। हालांकि, बीते दिन इस सूची में एक नाम और जुड़ गया, जब राहुल ने कहा कि इस काम में 'देहरादून में छिपी हुई महिला' भी शामिल हैं। इसके बाद अटकलें तेज हो गईं कि आखिर ये महिला कौन है। आइए पूरा विवाद समझते हैं।

बयान

राहुल ने क्या कहा?

बीते दिन INDIA की बैठक के बाद राहुल ने कहा, "देश में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बहाल करने के लिए विपक्ष की लड़ाई जारी रहेगी। हम आपसे वादा करते हैं कि इस काम को अंजाम देने वाले लोगों को न्याय के कटघरे में लाया जाएगा। इनमें नरेंद्र मोदी, अमित शाह, ज्ञानेश कुमार, देहरादून में छिपी हुई महिला और अन्य लोग शामिल हैं।"

उन्होंने कहा कि यह लड़ाई राजनीतिक पार्टी के लिए नहीं, बल्कि देश की जनता और भविष्य के लिए है।

महिला

कौन है देहरादून में छिपी महिला?

राहुल ने किसी महिला का नाम नहीं लिया है, लेकिन जानकार लोग इसे चुनाव आयोग की महानिदेशक (IT) सीमा खन्ना से जोड़ रहे हैं।

कांग्रेस कार्यकर्ता विजय थोत्ताथिल ने दावा किया कि राहुल का इशारा संभवतः सीमा की ओर ही था। उन्होंने सवाल उठाया कि राहुल ने जिस महिला का जिक्र किया, वह वोट चोरी के मामले में ज्ञानेश कुमार जितनी ही जिम्मेदार है।

AICC की मीडिया समन्वयक हरमीत कौर ने भी कहा कि सीमा को कौन बचा रहा है।

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परिचय

कौन हैं सीमा खन्ना?

सीमा ने एमटेक की पढ़ाई की है। उनके पास IIT दिल्ली से सूचना सुरक्षा में डॉक्टरेट की उपाधि भी है। वे राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) में भी काम कर चुकी हैं।

2025 में प्रतिनियुक्ति पर उन्हें चुनाव आयोग में जिम्मेदारी मिली थी। फिलहाल वे चुनाव आयोग में महानिदेशक (IT) के पद पर कार्यरत हैं।

उन्हें आयोग के डिजिटल और तकनीकी सिस्टम की कमान सौंपी गई है। उन्होंने ECINet के विकास और कार्यान्वयन में मुख्य भूमिका निभाई है।

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विवाद

सीमा को लेकर क्या है विवाद?

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, दोनों चुनाव आयुक्तों ने जिन मुद्दों पर आपत्ति जताई थी, उनमें एक मुद्दा ERO को पोर्टल तक पहुंच से रोकने का भी था।

लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम और मतदाता पंजीकरण नियमों के तहत, ERO की मतदाता सूचियों में नाम जोड़ने, सुधारने और हटाने की वैधानिक जिम्मेदारी है।

इसी वजह से खन्ना की भूमिका जांच के दायरे में आ गई है और वे विपक्ष की आलोचना का सामना कर रही हैं।

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