आसाराम को 2013 के बलात्कार मामले में तत्काल नहीं मिली जमानत, स्वास्थ्य बिगड़ने पर होगा विचार
क्या है खबर?
जोधपुर में नाबालिग लड़की से बलात्कार के मामले में सजा काट रहे आसाराम बापू को मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट से कोई राहत नहीं मिली। आसाराम ने 2013 बलात्कार मामले में सजा को बरकरार रखने के राजस्थान हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी। न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और शील नागू की पीठ ने आसाराम की याचिका पर राजस्थान सरकार से जवाब मांगा। कोर्ट ने कहा वह राज्य को सुने बिना और स्वास्थ्य स्थिति स्पष्ट न होने तक जमानत नहीं देगी।
सुनवाई
कोर्ट ने क्या कहा?
कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा, "हम फिलहाल जमानत नहीं दे रहे हैं। राज्य की बात सुनने के बाद, हम इस पर विचार करेंगे कि क्या जमानत देना गंभीर रूप से जरूरी है, जैसे कि (यदि उनकी स्वास्थ्य स्थिति ऐसी है कि) उनके जीवन को खतरा है। लेकिन हम नोटिस जारी कर रहे हैं। हमें इस पर विचार करना होगा। जवाब दाखिल करने के लिए 3 सप्ताह का समय दिया गया है।" सरकारी वकील ने उनकी जमानत का विरोध किया।
सुनवाई
स्वास्थ्य बिगड़ने पर मिलेगी छूट
कोर्ट ने आगे कहा कि अगर आसाराम का स्वास्थ्य बिगड़ता है तो तत्काल राहत के लिए छूट दी जा सकती है। कोर्ट ने कहा, "हम बस इतना कह सकते हैं कि याचिकाकर्ता को दी जा रही चिकित्सा सुविधा जारी रहेगी। यदि जीवन बचाना अत्यंत आवश्यक हो, तो हम छूट दे सकते हैं और देरी नहीं करेंगे। लेकिन हम राज्य की बात सुनेंगे। हमें न्याय करना है। हमें यह भी देखना होगा कि याचिकाकर्ता की भी एक मजबूत स्थिति है।"
विवाद
मई ने हाई कोर्ट ने फैसला रखा है बरकरार
आसाराम को अगस्त 2013 में जोधपुर के मणई स्थित उनके आश्रम में 16 वर्षीय उनकी अनुयायी को कैद करने और उसके साथ बलात्कार करने के आरोप में अप्रैल 2018 में दोषी ठहराया गया है। जोधपुर की विशेष कोर्ट ने आसाराम को उम्रकैद और 5 लाख रुपया का जुर्माना पीड़िता को देने का आदेश सुनाया था। इसके बाद आसाराम ने राजस्थान हाई कोर्ट में अपील की थी, जिसने मई में सजा में बरकरार रखा। अब आसाराम सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है।