विद्या बालन दक्षिण भारतीय फिल्मों को मानती हैं 'ज्यादा पुरुषवादी', बदलाव की करती हैं उम्मीद
क्या है खबर?
बॉलीवुड अभिनेत्री विद्या बालन रजनीकांत की नई फिल्म 'जेलर 2' के जरिए दक्षिण भारतीय सिनेमा में कदम रख चुकी हैं। इसी बीच उन्होंने जूम से बात करते हुए दक्षिण भारतीय सिनेमा पर अपनी राय सामने रखी है। एक ओर अभिनेत्री ने रजनीकांत की उदारता की तारीफ की। वहीं, दूसरी ओर उन्होंने कहा कि उनके हिसाब से दक्षिण भारतीय फिल्में ज्यादा पुरुषवादी होती हैं। विद्या उम्मीद करती हैं कि ये चलन जल्दी बदल जाएगा।
विद्या
दक्षिण भारतीय फिल्में हाइपर-मस्कुलिनिटी वाली होती हैं- विद्या
विद्या ने इंटरव्यू के दौरान कहा, "मुझे 'जेलर 2' के सेट पर हाइपर-मस्कुलिनिटी महसूस नहीं हुई। हालांकि, दक्षिण भारतीय फिल्में हाइपर-मस्कुलिनिटी वाली होती हैं। मैंने भी गौर किया है कि उनमें हाइपर-मस्कुलिनिटी होती है। उम्मीद करते हैं कि इसमें बदलाव आए और इन फिल्मों में महिलाओं के लिए और भी दिलचस्प किरदार देखने को मिलें।"
उन्होंने इसके अलावा भारतीय सिनेमा में महिलाओं के नेतृत्व वाली फिल्मों की कमी के बारे में भी बात की।
बयान
महिलाओं पर केंद्रित फिल्मों की कमी पर बोलीं विद्या
विद्या ने कहा, "हिंदी सिनेमा में भी हमें महिलाओं पर केंद्रित फिल्में उतनी देखने को नहीं मिलतीं। मुझे उम्मीद है कि हम एक बार फिर ऐसे दौर में पहुंचेंगे, जहां महिलाओं पर केंद्रित फिल्मों की भरमार हो। सिर्फ हिंदी सिनेमा में ही नहीं, बल्कि सभी भाषाओं में।"
उनके मुताबिक, महिलाओं की ऐसी कई दिलचस्प कहानियां हैं, जिन्हें बड़े पर्दे पर दर्शाया जाना चाहिए। 'जेलर 2' में विद्या ने कांता कल्पक की भूमिका निभाई है, जिससे वह बहुत खुश हैं।