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3 सालों तक जमा किए 10 के सिक्कों की पोटली लेकर शोरूम पहुंचा व्यक्ति, खरीदी स्कूटी
10 रुपये के सिक्के जमाकर खरीदी एक्टिवा

3 सालों तक जमा किए 10 के सिक्कों की पोटली लेकर शोरूम पहुंचा व्यक्ति, खरीदी स्कूटी

लेखन सयाली
Oct 13, 2026
03:58 pm

क्या है खबर?

गाड़ी लेना हर किसी का सपना होता है, जिसके लिए लोग सालों तक पैसे जोड़ते हैं। हालांकि, तेलंगाना के एक व्यक्ति ने पाई-पाई जोड़कर अपने गाड़ी खरीदने के सपने को पूरा कर दिखाया है। दरअसल, इस व्यक्ति ने 3 सालों तक 10 रुपये के सिक्के जमा किए। इन सिक्कों को जोड़-जोड़ कर उनके पास इतनी रकम जमा हो गई कि वह सीधे गाड़ी के शोरूम गए और अपने सपनों की नई एक्टिवा स्कूटी खरीदकर घर ले आए।

मामला

रोजाना बचाते थे 10-10 रुपये

व्यक्ति का नाम बी रवि जोसेफ है, जो 51 साल के हैं और एक चर्च में पादरी हैं। वह सालों से रॉयल एनफील्ड बुलेट खरीदने का ख्वाब देख रहे थे, लेकिन पैसों की तंगी उनके सपने को पूरा नहीं होने दे रही थी।

ऐसे में उन्होंने एक्टिवा खरीदने का मन बना लिया और पैसे जोड़ने में लग गए। उन्होंने 10 अक्टूबर, 2023 से बचत शुरू की और रोजमर्रा की खरीदारी से बचने वाले 10-10 के सिक्कों को इखट्टा करने लगे।

रवि

रॉयल एनफील्ड बुलेट खरीदने की थी इच्छा

मंचेरियल जिले के लक्सेट्टीपेट के निवासी रवि ने 3 सालों तक 10 रुपये के सिक्कों को जमा किया। आखिरकार वह दिन आया, जिसका उन्हें सालों से इंतजार था।

उन्होंने इन्हीं सिक्कों की बदौलत 1.23 लाख रुपये की नई होंडा एक्टिवा खरीद ली। रवि ने बताया कि वह कभी किराने के खर्च से तो कभी बाहर जाते समय 10-10 रुपये बचाते थे।

हालांकि, उन्हें अफसोस है कि वह रॉयल एनफील्ड बुलेट खरीदने जितने पैसे नहीं जमा कर सके थे।

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मुश्किल

सामने आईं थीं ये मुश्किलें

रवि ने बताया कि जब उन्होंने पैसे जमा करने शुरू किए तब उनके मन में ख्याल आया था कि उनसे वह घर की जरूरत की चीजें खरीद सकते हैं।

हालांकि, बाद में उन्होंने 2 पहिया गाड़ी लेने का निर्णय लिया। बीच में उन्हें खबर मिली कि 10 के सिक्के बंद हो सकते हैं।

यह सुनकर रवि थोड़े निराश हुए और परिवार ने सिक्के जमा न करने की सलाह दी। हालांकि, उनका हौंसला नहीं हारा और वह सिक्के जमा करते गए।

शोरूम

2 घंटे में गिने गए थे सिक्के

जब रवि 10-10 के सिक्कों से भरी पोटलियां लेकर जगदंबा होंडा मोटर्स के शोरूम पहुंचे तो वहां के कर्मचारियों के होश उड़ गए। सिक्कों को गिनने में 2 घंटे का समय लग गया था।

एक्टिवा को देखते ही रवि और उनके परिवार वालों की खुशी का ठिकाना नहीं था। यह खबर जल्दी ही रवि के शहर और फिर पूरे देश में वायरल हो गई।

रवि सिखाते हैं कि अगर कुछ ठान लो तो वह संभव हो कर ही रहता है।

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