कप्तानी छोड़ने के बाद हरमनप्रीत का दिलचस्प बयान, कहा- बस खेल का मजा लेना चाहती हूं
क्या है खबर?
भारतीय महिला क्रिकेट टीम की दिग्गज बल्लेबाज हरमनप्रीत कौर ने जिम्बाब्वे क्रिकेट टीम के खिलाफ तीसरे टी-20 मैच में अर्धशतक (91*) लगाया। उन्होंने हाल ही में कप्तानी छोड़ी थी और स्मृति मंधाना की अगुआई में खेलते हुए उन्होंने ये बेहतरीन पारी खेली। मैच जीतने के बाद हरमनप्रीत ने दिलचस्प बयान दिया है। उन्होंने कप्तानी छोड़ने के बाद अब बिना दबाव में खेलने की बात कही है। आइए जानते हैं उन्होंने क्या कुछ कहा है।
बयान
मैं सिर्फ अपनी बल्लेबाजी का आनंद लेना चाहती हूं- हरमनप्रीत
जिम्बाब्वे के खिलाफ सीरीज के तीसरे टी-20 मैच के बाद हरमनप्रीत ने कहा, "मुझे नहीं लगता कि अब मेरे ऊपर किसी तरह का दबाव है। अब बस मैदान पर मजे की बात है और मैं यही करना चाहती हूं। मुझे मैदान पर खेलने में वाकई मजा आता है। मैं सिर्फ अपनी बल्लेबाजी का आनंद लेना चाहती हूं और अच्छी बात यह है कि रन भी बन गए।"
बयान
अपनी अर्धशतकीय पारी को लेकर क्या बोली हरमनप्रीत?
हरमनप्रीत ने इस महीने की शुरुआत में कप्तानी छोड़ी थी।
इस मैच से पहले वह लगातार 8 पारियों में कोई अर्धशतक नहीं लगा पाई थीं।
उन्होंने अपनी पारी के बारे में कहा, "जब मैंने अपना पहला चौका मारा, तभी मुझे समझ आ गया कि पिच अच्छी है और बल्ला गेंद पर अच्छे से आ रहा है। उस शॉट से मुझे आत्मविश्वास मिला, और मैंने सोचा कि बस इसी तरह आगे बढ़ती रहूं और देखती हूं कि आगे क्या होता है।"
पारी
बेहतरीन रही हरमनप्रीत की पारी
जिम्बाब्वे के खिलाफ तीसरे टी-20 अंतरराष्ट्रीय में हरमनप्रीत ने अपने करियर का 19वां अर्धशतक केवल 25 गेंदों में पूरा किया।
उन्होंने आक्रामक अंदाज में बल्लेबाजी करते हुए 41 गेंदों में नाबाद 91 रन बनाए। अपनी पारी में उन्होंने 10 चौके और 5 छक्के लगाए।
उनकी पारी की बदौलत भारतीय टीम मुकाबले में 216/7 का स्कोर बनाने में सफल रही।
इसके जवाब में जिम्बाब्वे की टीम 124/7 का स्कोर ही बना सकी।
बयान
हरमनप्रीत ने बल्लेबाजी कोच को भी दिया श्रेय
हरमनप्रीत ने इस पारी के लिए अपने बल्लेबाजी कोच को श्रेय दिया।
उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि बल्लेबाजी स्विंग मेरी सबसे अहम खूबी है, और मैं नेट्स में बस इसी का अभ्यास करते रहना चाहती हूं। इसका श्रेय मैं अपने बल्लेबाजी कोच हिमांशु भैया को देना चाहूंगी, जिन्होंने बहुत मेहनत की है और मेरी बल्लेबाजी शैली को अच्छे से समझा है। मुझे लगता है कि उनकी रणनीतियां और उनके विचार बहुत कारगर हैं।"