Loading...
BCCI के CoE में एक साल में 32 शीर्ष क्रिकेटरों का हुआ रिहैब- रिपोर्ट 
अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच 32 खिलाड़ी पहुंचे CoE (तस्वीर: एक्स/@BCCI)

BCCI के CoE में एक साल में 32 शीर्ष क्रिकेटरों का हुआ रिहैब- रिपोर्ट 

Oct 09, 2026
11:33 am

क्या है खबर?

पिछले कुछ समय से भारतीय क्रिकेट टीम के कई खिलाड़ी चोट की समस्या से जूझ रहे हैं। यही कारण है कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) भी चोट प्रबंधन को लेकर सवालों के घेरे में रहे हैं। इस बीच रिपोर्ट्स के मुताबिक, बेंगलुरु स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) ने एक साल में 30 से अधिक शीर्ष क्रिकेटरों की चोट का इलाज किया है। आइए इस खबर पर एक नजर डालते हैं।

रिपोर्ट 

अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच 32 खिलाड़ी पहुंचे CoE

टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, पिछले साल भारत के 32 शीर्ष क्रिकेटर CoE में इलाज के लिए आए, जिसमें से 20 खिलाड़ी BCCI के सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट का हिस्सा हैं।

ऐसे ही 12 नाम इंडिया-A या युवा प्रतिभाशाली खिलाड़ियों के रहे।

CoE की वार्षिक रिपोर्ट अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच की है।

IPL 2026 के बाद चोटिल खिलाड़ियों की संख्या में इजाफा हुआ, जिसमें हर सीरीज में कम से कम 2 खिलाड़ी चोटिल हुए हैं।

रिपोर्ट 

BCCI ने CoE का बजट बढ़ाया  

CoE के अधिकारी पहले भी IPL फ्रेंचाइजी के दबाव को इसकी एक वजह बता चुके हैं।

BCCI ने CoE का बजट पिछले वित्त वर्ष के असल खर्च से करीब 35 करोड़ रुपये बढ़ाया है। इस खर्च में प्रशासनिक लागत, कोर्स और मैच के खर्च शामिल हैं।

अब CoE का बजट बढ़कर 2026-27 के लिए कुल 127 करोड़ हो गया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारतीय टीम और CoE के स्पोर्ट्स साइंस मेडिसिन टीम के बीच कम्युनिकेशन गैप भी सामने आया है।

ADVERTISEMENT

चोट 

हर्षित राणा, नितिश कुमार रेड्डी और प्रसिद्ध कृष्णा ने COE में बिताया काफी समय 

ऋषभ पंत की पैर की चोट एकमात्र गंभीर चोट बताई गई है, जो उन्हें मैनचेस्टर टेस्ट 2025 में लगी थी।

रोहित शर्मा भी हैमस्ट्रिंग के बाद CoE गए, लेकिन BCCI ने आधिकारिक बयान नहीं दिया।

जसप्रीत बुमराह, हार्दिक पांड्या, हर्षित राणा, नितिश कुमार रेड्डी और प्रसिद्ध कृष्णा जैसे खिलाड़ी बार-बार इलाज के लिए आए।

राणा, पांड्या और रेड्डी ने पिछले 18 महीनों में कम से कम 4-4 महीने बिताए।

सितंबर 2026 तक विराट कोहली भी इस सूची में जुड़े।

ADVERTISEMENT

चोट 

ज्यादतर चोटें सॉफ्ट-टिश्यू की रही

पिछले एक साल में सर्वाधिक चोटें सॉफ्ट-टिश्यू की रही।

आखिरी बार भारतीय क्रिकेट में सॉफ्ट-टिश्यू चोटों का सिलसिला 2021-22 में देखा गया था, जब खिलाड़ी कोविड-19 महामारी के दौरान बबल से बाहर निकलकर खेलने लगे थे।

उस समय यह समस्या 2-3 महीने में काबू में आ गई थी।

2017 में भी 3 महीने का ऐसा दौर आया था जब स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग कोच शंकर बसु द्वारा फिटनेस प्रोग्राम में बड़े बदलाव करने के बाद कई खिलाड़ी चोटिल हो गए थे।

ADVERTISEMENT