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अखिलेश यादव ने राज्यसभा चुनाव में क्यों नहीं उतारा तीसरा प्रत्याशी?
समाजवादी पार्टी ने राज्यसभा चुनाव में तीसरा उम्मीदवार नहीं उतारा है

अखिलेश यादव ने राज्यसभा चुनाव में क्यों नहीं उतारा तीसरा प्रत्याशी?

लेखन आबिद खान
Oct 07, 2026
01:27 pm

क्या है खबर?

उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों पर चुनाव के बीच समाजवादी पार्टी (SP) ने तीसरा प्रत्याशी नहीं उतारा है। राजनीतिक विश्लेषक इसे आंतरिक कलह को रोकने और विधानसभा चुनावों से पहले संभावित अपमान से बचने के उद्देश्य से उठाया गया रणनीतिक कदम मान रहे हैं। दरअसल, SP के पास 2 उम्मीदवारों को जिताने के पर्याप्त वोट होने के बावजूद विधायक बचे थे। इसलिए माना जा रहा था कि वो तीसरा प्रत्याशी उतार सकती है। आइए फैसले की वजह समझते हैं।

वजह

क्या पार्टी को था क्रॉस वोटिंग का डर?

विश्लेषकों का मानना ​​है कि यह कदम मतदान की शर्मिंदगी से पार्टी को बचाने के लिए उठाया गया है।

अगर SP ने तीसरा उम्मीदवार खड़ा किया होता और वो हार जाता या पार्टी के विधायक क्रॉस वोटिंग करते तो इससे पार्टी की दरार सार्वजनिक रूप से उजागर हो जाती, जिससे कार्यकर्ताओं का मनोबल गिर सकता था।

सबसे अहम बात है कि इससे विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस के साथ सीट बंटवारे की बातचीत में पार्टी को झटका लग सकता था।

चुनाव

विधानसभा चुनाव पर पार्टी का ध्यान

राजनीतिक हलकों का मानना ​​है कि यह सोच-समझकर लिया गया फैसला एक अतिरिक्त सीट के लिए लड़ाई के बजाय संगठनात्मक स्थिरता को प्राथमिकता देता है।

विश्लेषकों के मुताबिक, अगर SP तीसरा उम्मीदवार उतारती तो राज्यसभा चुनाव का पूरा गणित बदल जाता। जो उम्मीदवार आसानी से चुने जा सकते हैं, उनके बीच कड़ा मुकाबला हो जाता।

इससे दोनों खेमों में क्रॉस वोटिंग होती, जिसका असर 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव में भी देखने को मिलता।

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पिछली स्थिति

2024 जैसे हालात दोबारा नहीं चाहती थी पार्टी

फरवरी, 2024 में हुए राज्यसभा चुनावों में विधायकों की संख्या के आधार पर भाजपा को 7 और SP को 3 सीटें मिलने की उम्मीद थी।

हालांकि, भाजपा ने 8वां उम्मीदवार खड़ा कर दिया था, जिससे चुनाव रोमांचक हो गया। नतीजों में भाजपा के सभी 8 उम्मीदवार जीत गए, जबकि SP के केवल 2 उम्मीदवार ही सफल हो पाए।

तब SP के लगभग 7 विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की थी। पार्टी वैसी स्थिति दोबारा नहीं चाहती थी।

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विधायक

विधायकों की संख्या के हिसाब से क्या है स्थिति?

उत्तर प्रदेश विधानसभा में कुल 403 सीटें हैं। फिलहाल 7 खाली हैं। यानी 396 विधायक हैं।

एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए 37 प्रथम वरीयता वोट की जरूरत पड़ेगी।

फिलहाल SP के पास 101 और भाजपा के पास 255 विधायक हैं। इस हिसाब से SP 2 और भाजपा का 7 सीटों पर जीतना तय है। भाजपा ने भी 8वां उम्मीदवार नहीं उतारा है। यानी दोनों पक्षों को क्रॉस वोटिंग का कोई डर नहीं है।

राज्यसभा चुनाव

कैसे होते हैं राज्यसभा चुनाव?

राज्यसभा चुनाव में विधायक हर सीट के लिए अलग-अलग वोट नहीं डाल सकते क्योंकि अगर ऐसा होगा तो हर सीट पर सत्तारूढ़ पार्टी ही कब्जा कर लेगी।

दरअसल, मतदान के वक्त हर विधायक को एक सूची दी जाती है, जिसमें उसे राज्यसभा प्रत्याशियों के लिए अपनी पहली पसंद, दूसरी पसंद और तीसरी पसंद आदि लिखनी होती है।

इसके बाद एक फॉर्मूले की मदद से तय किया जाता है कि कौन सा प्रत्याशी जीता।

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