पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के सहयोगियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले में होगी CBI जांच
क्या है खबर?
पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने सोमवार को पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के करीबी सहयोगियों से जुड़े कथित भ्रष्टाचार की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने का आदेश दिया है। कोर्ट ने यह आदेश अधिवक्ता निखिल सराफ की जनहित याचिका पर सुनाया। दरअसल, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पंजाब के पुलिस महानिदेशक (DGP) को पत्र लिखकर मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की थी। पुलिस कार्रवाई न होने पर याचिका दायर की गई।
मामला
क्या है पूरा मामला?
ED ने DGP गौरव यादव को 3 पत्र लिखे हैं, जिसमें कहा गया है कि मुख्यमंत्री मान के विशेष ड्यूटी अधिकारी (OSD) राजबीर सिंह घुमन, उनके सहयोगी नितिन गोहल और बीर देविंदर भ्रष्टाचार में शामिल हैं।
ED ने तीनों पर तबादलों और नियुक्तियों, भूमि उपयोग परिवर्तन (CLU) मामलों, सरकारी निविदाओं में हस्तक्षेप और राज्य में अन्य कार्यों में व्यापक भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए FIR की मांग की थी।
हालांकि, पंजाब पुलिस पत्रों पर शांत थी।
याचिका
पुलिस के कार्रवाई न करने पर याचिका दायर
ED के पत्र पर पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई न किए जाने के बाद जनहित याचिका दायर की गई थी।
शिकायतकर्ता ने अपनी याचिका में कहा है कि जांच एजेंसी ने CMO से जुड़े अधिकारियों पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं, जिनकी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।
उन्होंने मामले को CBI को सौंपने की मांग की थी, जो पंजाब पुलिस और पंजाब सतर्कता के प्रभाव से मुक्त हो। इसी को लेकर सोमवार को आदेश दिया गया है।
घटना
कैसे सामने आया मामला?
ED ने यह आरोप तब लगाए हैं, जब उसकी जांच मे एक हाउसिंग सोसाइटी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले और CLU की अनुमति प्राप्त करने में कथित अनियमितताओं का खुलासा हुआ।
एजेंसी ने प्रक्रिया में फर्जी सहमति पत्रों का इस्तेमाल करने और CMO से जुड़े लोगों की कथित भूमिका पर सवाल उठाए थे।
पिछले महीने, शिरोमणि अकाली दल ने राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया से CMO से संचालित संगठित भ्रष्टाचार रैकेट की CBI जांच की सिफारिश करने का आग्रह किया था।