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लद्दाख की 14,000 फीट ऊंचाई सहने के लिए कैसे होती है मिलिट्री कुत्तों की ट्रेनिंग?
लद्दाख में तैनात मिलिट्री कुत्तों की ट्रेनिंग (तस्वीर: एक्स/@ANI)

लद्दाख की 14,000 फीट ऊंचाई सहने के लिए कैसे होती है मिलिट्री कुत्तों की ट्रेनिंग?

लेखन सयाली
Oct 05, 2026
05:54 pm

क्या है खबर?

भारतीय सेना और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल (ITBP) ने लद्दाख सीमा पर निगरानी और सुरक्षा अभियानों के लिए प्रशिक्षित हिमालयी कुत्तों को तैनात किया है। इनमें न केवल विदेशी, बल्कि बखर्वाल और तिब्बती मैस्टिफ जैसी देसी नस्लें भी शामिल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) के संवेदनशील पोस्ट पर इन्हें तैनात किया गया है, जो 14,000 फीट तक की ऊंचाई पर हैं। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि इन कुत्तों की ट्रेनिंग कैसे होती है?

ट्रेनिंग

इन कुत्तों को दी जाती है ऊंचाई वाली खास ट्रेनिंग

इतनी ऊंचाई पर सुरक्षा सुनिश्चित करने वाले ये कुत्ते कड़ी ट्रेनिंग से गुजरते हैं, ताकि वे मजबूत बन सकें और कठिन मौसमी स्थिति का सामना कर सकें।

इन कुत्तों को सामान्य सुरक्षा ट्रेनिंग के साथ-साथ अधिक ऊंचाई वाली ट्रेनिंग भी दी जाती है।

यह ट्रेनिंग अलग होती है, क्योंकि कुत्ते को चीजों का पता लगाने या गश्त करने जैसे आम कार्य करते हुए कम ऑक्सीजन और ज्यादा ठंड के हिसाब से भी खुद को ढालना पड़ता है।

प्रक्रिया

कैसे शुरू होती है ट्रेनिंग?

ट्रेनिंग की शुरुआत में कुत्तों को एक्सरसाइज या मुश्किल काम नहीं दिए जाते। इसके बजाय पहले उन्हें मौसम, ऊंचाई और ठंड से ताल-मेल बैठाने और उन्हें सहन करने का समय दिया जाता है।

इसमें हफ्तों का समय लग सकता है। जैसे-जैसे कुत्ता ऊंचाई के प्रति बेहतर सहनशीलता विकसित करता है, वैसे-वैसे काम का बोझ धीरे-धीरे बढ़ाया जाता है।

ऐसे उनके ऊपर ज्यादा दबाव भी नहीं पड़ता है और उनके बीमार होने का खतरा भी नहीं रहता है।

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सांस लेना

कुत्ते कम हवा वाले माहौल में कैसे करते हैं अपना काम?

14,000 फीट की ऊंचाई पर हवा में ऑक्सीजन की मात्रा समुद्र तल की तुलना में काफी कम होती है। ऐसे में लाजमी है कि कुत्तों को भी सांस लेने और कोई भी कार्य करने में परेशानी हो सकती है।

साथ ही मिलिट्री कुत्तों को तो सांस लेने और जीवित रहने के साथ-साथ कई कार्य भी करने होते हैं। ऐसे में उनकी गति को नियंत्रित करने और पर्याप्त आराम व रिकवरी का समय देने पर ध्यान दिया जाता है।

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स्वास्थ्य समस्याएं

कुत्तों को रहता है इन परेशानियों का खतरा

इतनी ठंडी जगहों पर कुत्तों को कई स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। उन्हें फ्रॉस्टबाइट और हाइपोथर्मिया से सुरक्षा की जरूरत होती है, जो ठंड से होने वाली बीमारियां हैं।

अगर कोई कुत्ता तेजी से सांस ले रहा है, जल्दी थक रहा है या सामान्य से ज्यादा समय में ठीक हो रहा है तो वह बीमार हो सकता है। ठंड के कारण उनके पंजों में परेशानियां, जोड़ों में दर्द और चोट का खतरा भी रहता है।

खान-पान

पोषण और हाइड्रेशन है अहम

सही देखभाल और अच्छे खान-पान के जरिए इन कुत्तों को स्वास्थ्य समस्याओं से बचाया जाता है। पोषण को काम के बोझ और मौसम के हिसाब से तय किया जाता है।

ज्यादा ठंड और ऊंचाई पर काम करने वाले कुत्तों को ताकत बनाए रखने के लिए ज्यादा ऊर्जा की जरूरत हो सकती है। उनकी डाइट में मांसाहारी भोजन जोड़ा जाता है, जो उन्हें ऊर्जा देता है।

इसके साथ हाइड्रेशन भी अहम है, जो निर्जलीकरण जैसी समस्याओं से बचाता है।

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