12 घंटे काम, छुट्टी नहीं; सूरत से क्यों गांव लौट रहे उत्तर प्रदेश-बिहार के लाखों मजदूर?
क्या है खबर?
गुजरात के कपड़ा और हीरा उद्योग का केंद्र सूरत एक बार फिर गलत वजहों से चर्चा में हैं। यहां काम कर रहे उत्तर प्रदेश और बिहार के लाखों मजदूर अचानक सूरत छोड़कर अपने गांव लौट रहे हैं। मजदूरों ने इसे 'गांव चलो आंदोलन' नाम दिया है। सूरत रेलवे स्टेशन पर मजदूरों की भीड़ उमड़ रही है और प्लेटफॉर्म्स पर लंबी-लंबी लाइनें लग गई हैं। आइए जानते हैं इस 'गांव चलो आंदोलन' के पीछे की पूरी सच्चाई।
आंदोलन
क्या है 'गांव चलो आंदोलन'?
दरअसल, उत्तर प्रदेश और बिहार के लाखों मजदूरों ने काम के ज्यादा घंटे, छुट्टी न मिलना और कम वेतन की वजह से ये आंदोलन शुरू किया है।
अगस्त से ही इस संबंध में विरोध हो रहा था, लेकिन कारखाना मालिकों ने मजदूरों का आश्वासन दिया था। हालांकि, वादे पूरे नहीं होने पर अक्टूबर में फिर आंदोलन ने जोर पकड़ा।
लेबर यूनियन के प्रतिनिधि अजय डी दुबे ने बताया कि 'गांव चलो आंदोलन' के तहत लाखों मजदूर वापस लौट रहे हैं।
आरोप
क्या हैं मजदूरों के आरोप?
मजदूरों का कहना है कि उनका मानसिक और आर्थिक शोषण हो रहा है।
उनसे रोजाना 12 घंटे तक काम कराया जाता है, समय पर वेतन नहीं दिया जाता है और न ही हफ्ते में एक दिन की छुट्टी मिलती है।
मजदूरों ने बताया कि महीने के पूरे 30 दिन लगातार काम करने का दबाव बनाया जाता है। अगर बीमारी की वजह से भी छुट्टी लेता है तो उसका वेतन काट लिया जाता है या नौकरी से निकाल दिया जाता है।
बयान
मजदूर बोले- छुट्टी मांगने पर वेतन काट लिया
न्यूज18 से अयोध्या के मजदूर प्रेमचंद्र ने कहा, "जब मैंने हफ्ते में एक रविवार की छुट्टी मांगी तो पहले तो मालिक ने दिलासा दिया लेकिन बाद में मना कर दिया। कई को एक छुट्टी मांगने पर नौकरी से निकाल दिया।"
प्रयागराज के बृजेश निषाद ने कहा, "4-5 महीने से काम कर रहा हूं। छुट्टी मांगने पर वेतन काट लिया जाता है। यहां गुलाम बनने से तो अच्छा है कि गांव जाकर खेती करें या रेत में खीरा उगाकर गुजारा करें।"
मांगें
क्या हैं मजदूरों की मांगें?
मजदूरों की प्रमुख मांगों में काम के घंटों को घटाकर 8 घंटे प्रतिदिन करना और हफ्ते में एक दिन सवैतनिक अवकाश देना है।
इसके अलावा वे समय पर वेतन भुगतान और भविष्य निधि, कर्मचारी राज्य बीमा (ESI) और लागू होने पर ग्रेच्युटी लाभों सहित श्रम सुरक्षा उपायों के बेहतर कार्यान्वयन की भी मांग कर रहे हैं।
मजदूरों ने कहा कि इन मांगों के पूरा होने के बाद ही वे वापस लौटने पर विचार करेंगे।
आंकड़े
10 लाख मजदूरों के लौटने का दावा
अलग-अलग रिपोर्ट में दावा किया गया है कि करीब 10 लाख मजदूर सूरत छोड़ गांवों को लौट चुके हैं। हालांकि, इस संबंध में कोई आधिकारिक आंकड़ा नहीं है।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, सूरत में कपड़ा उद्योग में 18 लाख से अधिक प्रवासी श्रमिक काम करते हैं।
हालांकि, ये भी माना जा रहा है कि त्योहारों के चलते कई मजदूर अपने घर जा रहे हैं, जो आमतौर पर एक सालाना प्रथा है।