फॉर्म-6 में बदलाव क्यों चाहते हैं महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी, क्या है विवाद?
क्या है खबर?
चुनाव आयोग और मतदाता सूची के SIR को लेकर चल रहे विवाद के बीच महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) ने चुनाव आयोग से 'फॉर्म 6' में बदलाव करने का अनुरोध किया है। CEO ने अपने प्रस्ताव में कहा गया है कि जो लोग मतदाता सूची में दोबारा नाम जुड़वाना चाहते हैं, उनसे पहली बार मतदाता बनने की घोषणा न कराई जाए। इसका मकसद उन मतदाताओं को राहत देना है, जिनके नाम SIR में मतदाता सूची से कट गए थे।
विवाद
क्या है मामला?
दरअसल, फॉर्म-6 में फिलहाल ये बताना होता है कि आवेदक पहली बार मतदाता सूची में नाम जुड़वा रहा है। फॉर्म में ये जानकारी देनी की बात पहली बार जोड़ी गई है।
अधिकारियों का कहना है कि SIR के दौरान जिन लोगों के नाम मतदाता सूची से कट गया है, वे इससे डर रहे हैं, क्योंकि झूठी घोषणा पर एक साल तक जेल, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।
इसी के बाद ये प्रस्ताव भेजा गया है।
प्रस्ताव
क्यों बदलाव चाहते हैं अधिकारी?
रिपोर्ट के मुताबिक, महाराष्ट्र के CEO ने यह प्रस्ताव पिछले हफ्ते चुनाव आयोग को भेजा है।
इसका उद्देश्य 'फॉर्म 6' में मौजूद उस घोषणा पत्र को लेकर हुई उलझन को दूर करना है, जिसमें आवेदकों को यह बताना पड़ता है कि वे पहली बार आवेदन कर रहे हैं।
अगर बदलाव होता है तो मतदाता खुद को 'पहली बार मतदाता' बताए बिना फिर से मतदाता सूची में अपना नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकेंगे।
बदलाव
फॉर्म में क्या-क्या बदलाव चाहते हैं अधिकारी?
CEO के प्रस्ताव में मुख्य रूप से 3 बदलावों की सिफारिश की गई है।
'फॉर्म 6' के शीर्षक से 'नए मतदाता' शब्द को हटाना।
उन लोगों के लिए एक वैकल्पिक घोषणा का विकल्प देना, जो पहले किसी विधानसभा सीट में पंजीकृत थे, लेकिन अब नहीं हैं और फिर से मतदाता सूची में शामिल होना चाहते हैं।
आवेदकों को पुराना EPIC नंबर देने की अनुमति देना, ताकि अधिकारी उनके पुराने वोटर पंजीयन का पता लगा सकें।