Loading...
#NewsBytesExplainer: हिरासत, गिरफ्तारी और एहतियातन हिरासत में क्या है फर्क?
दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान हजारों लोगों को हिरासत में लिया है

#NewsBytesExplainer: हिरासत, गिरफ्तारी और एहतियातन हिरासत में क्या है फर्क?

लेखन आबिद खान
Oct 14, 2026
07:03 pm

क्या है खबर?

राजधानी दिल्ली इन दिनों कई प्रदर्शनों की गवाह बन रही है। इस दौरान पुलिस भी सख्ती अपना रही है और प्रदर्शनकारियों को लगातार हिरासत में लिया जा रहा है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के 2 प्रवक्ताओं को तो गिरफ्तार भी किया गया है। इन दोनों को पहले एहतियातन हिरासत में लिया गया था। आइए आज हिरासत, गिरफ्तारी और एहतियातन हिरासत जैसे शब्दों का कानूनी मतलब समझने की कोशिश करते हैं।

एहतियातन हिरासत

क्या होती है एहतियातन हिरासत?

एहतियातन हिरासत का मतलब है किसी व्यक्ति को हिरासत में लेना ताकि उसे संभावित अपराध को करने से रोका जा सके। इसमें यह जरूरी नहीं है कि व्यक्ति ने कोई खास अपराध किया हो या उस पर आपराधिक आरोप हों।

अगर अधिकारियों को लगता है कि कोई व्यक्ति ऐसी गतिविधियों में शामिल हो सकता है, जिनसे सार्वजनिक व्यवस्था को खतरा हो, तो वे उसे एहतियातन हिरासत में ले सकते हैं।

संविधान

एहतियातन हिरासत को लेकर संविधान में क्या प्रावधान हैं?

संविधान के अनुच्छेद 22 में एहतियातन हिरासत के खिलाफ सुरक्षा उपायों का जिक्र है।

अनुच्छेद 22(4) के मुताबिक, आमतौर पर हिरासत 3 महीने से ज्यादा नहीं बढ़ाई जा सकती। अगर हिरासत की अवधि 3 महीने से ज्यादा बढ़ाई जाती है, तो मामला एक सलाहकार बोर्ड को भेजा जाता है।

अनुच्छेद 22(5) के तहत, हिरासत में लिए गए व्यक्ति को जल्द से जल्द इसकी वजह बताई जाए और उसे आदेश के खिलाफ अपनी बात रखने का मौका दिया जाए।

ADVERTISEMENT

हिरासत

क्या होती है हिरासत?

सरल शब्द में कहें तो हिरासत का मतलब है किसी व्यक्ति को कानूनी नियंत्रण में रखना, ताकि पुलिस जरूरी जानकारी जुटा सके। जरूरी नहीं कि वो व्यक्ति अपराध में शामिल हो।

उदाहरण के लिए, अगर पुलिस को किसी व्यक्ति पर कोई अपराध में शामिल होने का शक है, तो उसे हिरासत में ले लेती है। इस दौरान उससे पूछताछ या जांच की जा सकती है।

अगर व्यक्ति के पास कुछ संदिग्ध नहीं मिलता तो उसे छोड़ दिया जाता है।

ADVERTISEMENT

गिरफ्तारी

गिरफ्तारी क्या होती है?

गिरफ्तारी हिरासत से आगे की कार्रवाई है। जब पुलिस को लगता है कि किसी व्यक्ति के खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं या उसके खिलाफ वारंट जारी हुआ है, तब उसे गिरफ्तार किया जाता है।

गिरफ्तारी के बाद व्यक्ति पुलिस की कानूनी हिरासत में आ जाता है। उसकी व्यक्तिगत आजादी पर रोक लग जाती है।

यहां ध्यान देने वाली बात है कि गिरफ्तारी का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति ने अपराध किया है या कोर्ट ने उसे दोषी मान लिया है।

कानून

गिरफ्तारी को लेकर क्या कहता है कानून?

BNSS की धारा 35 ऐसी गिरफ्तारियों पर कुछ शर्तें लगाती हैं, जिनमें अपराध की प्रकृति और गिरफ्तारी की जरूरत से जुड़ी बातें शामिल हैं।

धारा 36 में गिरफ्तारी की प्रक्रिया और पुलिस के कर्तव्यों का जिक्र है।

धारा 47 के तहत, गिरफ्तार व्यक्ति को कारणों और जमानत के अधिकार के बारे में बताना जरूरी है।

वहीं, संविधान के अनुच्छेद 22(2) के अनुसार, गिरफ्तार व्यक्ति को 24 घंटे के भीतर (यात्रा समय छोड़कर) मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना जरूरी है।

न्यायिक हिरासत

अब न्यायिक हिरासत के बारे में भी जानिए

न्यायिक हिरासत में आरोपी को कोर्ट के आदेश के तहत हिरासत में रखा जाता है। आमतौर पर जेल भेज दिया जाता है।

पुलिस हिरासत में आरोपी पुलिस के नियंत्रण में रहता है, जबकि न्यायिक हिरासत में उसे जेल में रखा जाता है।

आमतौर पर ये तब होता है, जब पुलिस की शुरुआती पूछताछ हो चुकी हो और कोर्ट को लगता है कि फिलहाल आरोपी को पुलिस के पास रखने की जरूरत नहीं है, लेकिन उसे छोड़ा भी नहीं जा सकता।

ADVERTISEMENT