अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो 3 दिवसीय भारत दौरे पर मुंबई पहुंचे, जानिए क्या है एजेंडा
क्या है खबर?
अमेरिका के साथ तनाव के बीच विदेश सचिव मार्को रुबियो मंगलवार को भारत की 3 दिवसीय यात्रा पर मुंबई पहुंच गए। यह इस साल इनका दूसरा दौरा है। इस बार रुबियो राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली का दौरा नहीं करेंगे बल्कि देश के वित्तीय और औद्योगिक केंद्र मुंबई और गुजरात के जामनगर जाएंगे। उज्बेकिस्तान से सीधे मुंबई पहुंचे रुबियो को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गेटवे ऑफ इंडिया घुमाया। रुबियो के भारत दौरे का एजेंडा क्या है? आइए, जानते हैं।
एजेंडा
3 दिन क्या करेंगे रुबियो?
यात्रा के पहले दिन रुबियो ने 26/11 आतंकी हमलों के पीड़ितों को ताज महल पैलेस होटल में श्रद्धांजलि दी।
इसके बाद विदेश मंत्री एस जयशंकर के नेतृत्व में प्रतिनिधियों के बीच सामान्य बातचीत होगी, जिसमें टेक्नोलॉजी, क्षेत्रीय सुरक्षा विकास और द्विपक्षीय व्यापार पर फोकस होगा।
शाम को, दोनों नेता अमेरिकी स्वतंत्रता की 250वीं सालगिरह के मौके पर एक समारोह में शामिल होंगे।
बुधावर को रुबियो प्रमुख भारतीय कारोबारी एग्जीक्यूटिव, इंस्टीट्यूशनल निवेशक और बैंकिंग अधिकारियों के साथ निजी बैठक करेंगे।
यात्रा
गुरुवार को जामनगर जाएंगे रुबियो
गुरुवार को रुबियो रिलायंस इंडस्ट्रीज़ के बड़े रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स का दौरा करने के लिए जामनगर जाएंगे, जिसे दुनिया की सबसे बड़ी सिंगल-साइट रिफाइनरी माना जाता है।
रूबियो यात्रा खत्म करने से पहले, प्रोडक्शन क्षमता में सुधार करने, वैश्विक तेल बाजार में स्थायित्व पक्का करने, और अमेरिकी ऊर्जा बुनियादी ढांचे में रिलायंस के बड़े निवेश को आगे बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करेंगे।
इससे पहले रुबियो मई में भारत आए थे।
एजेंडा
व्यापार समझौते को लेकर सबकी नजर
रुबियो का दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब अमेरिका-भारत के बीच व्यापारिक तनाव देखने को मिल रहा है। रुबियो के दौरे का मुख्य फोकस प्रस्तावित व्यापार समझौते को पूरा कराना है।
इस दौरे से उम्मीद है कि भारतीय निर्यात पर अमेरिकी टैरिफ, बाजार तक पहुंच और व्यापार की शर्तों से जुड़े मतभेद दूर होंगे।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल में भारत को रूसी तेल खरीदने के कारण संभावित टैरिफ से राहत दी है, जिससे समझौते की उम्मीद बढ़ी है।
ऊर्जा
रिलायंस इंडस्ट्री क्यों जा रहे हैं रुबियो
जामनगर की रिलायंस रिफाइनरी रूसी तेल का एक मुख्य प्रोसेसर है और रिलायंस अमेरिका के टेक्सास में रिफाइनरी में निवेश की योजना बना रही है।
टेक्सास में लगने वाली रिफाइनरी अमेरिका में 5 दशकों में अपनी तरह का पहला नया प्रोजेक्ट है। यह वेनेज़ुएला के तेल का भी एक बड़ा खरीदार है, जिसकी बिक्री ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन के नियंत्रण में है।
इसलिए यहां ऊर्जा सुरक्षा और निवेश पर खास चर्चा होगी। रुबियो मुकेश अंबानी से मुलाकात भी करेंगे।
दौरा
यात्रा के मायने क्या हैं?
रुबियो का यह दौरा सिर्फ औपचारिक नहीं है बल्कि टैरिफ की धमकियां, रूसी तेल का मुद्दा, वीजा संबंधी सख्ती और ईरान तनाव के बीच कई प्रमुख मुद्दों को इंगित करता है।
यह यात्रा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए भी जमीन तैयारी, करेगी क्योंकि वह दिसंबर में अमेरिका में होने वाले G-20 शिखर सम्मेलन में जा सकते हैं।
अमेरिका ने हाल में रूसी तेल खरीदने के लिए भारत को छूट भी दी है, जिसको लेकर दोनों देशों के बीच तनाव था।
बयान
वेनेजुएला से तेल खरीदने की पेशकश
रुबियो ने भारत की अपने ऊर्जा स्रोत में विविधता लाने की कोशिशों का स्वागत किया और कहा कि अलग-अलग ऊर्जा पोर्टफोलियो वाला एक मजबूत साथी होना वाशिंगटन के हित में है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत की ऊर्जा विविधता सिर्फ रूसी तेल के बारे में नहीं, बल्कि आपूर्ति स्रोत बढ़ाने के बारे में भी है।
उन्होंने भारत को वेनेजुएला से तेल खरीदने की पेशकश देते हुए कहा कि दोनों पक्षों ने वेनेजुएला और दूसरे देशों पर चर्चा की है।