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सुप्रीम कोर्ट ने कहा- हिंदू धर्म से इस्लाम में धर्मांतरण कराने वाला नहीं पा सकता आरक्षण
हिंदू से मुस्लिम बनने वालों को नहीं मिलेगा आरक्षण

सुप्रीम कोर्ट ने कहा- हिंदू धर्म से इस्लाम में धर्मांतरण कराने वाला नहीं पा सकता आरक्षण

लेखन गजेंद्र
Oct 15, 2026
12:49 pm

क्या है खबर?

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को धर्मांतरण के बाद आरक्षण से जुड़े मद्रास हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है। हाई कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार के उस आदेश को रद्द किया था, जिसमें पिछड़े वर्गों, अति पिछड़े वर्गों, गैर-अधिसूचित समुदायों और अनुसूचित जातियों के व्यक्तियों को इस्लाम में परिवर्तित होने के बाद पिछड़े वर्ग के मुसलमानों के रूप में माने जाने की अनुमति दी गई थी। कोर्ट ने कहा कि धर्मांतरण करने वाला व्यक्ति आरक्षण का दावा नहीं कर सकता।

सुनवाई

कोर्ट ने क्या कहा?

न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और श्री चंद्रशेखर की पीठ ने फैसला सुनाया कि जो व्यक्ति हिंदू धर्म से किसी गैर-हिंदू धर्म में परिवर्तित होता है, वह सामाजिक रूप से पिछड़े वर्ग को मिलने वाले कल्याणकारी लाभों की मांग नहीं कर सकता।

कोर्ट ने आगे कहा कि संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश 1950 में भी यह मान्यता दी गई है कि अनुसूचित जाति का दर्जा उन व्यक्तियों को नहीं दिया जा सकता जो हिंदू, बौद्ध या सिख नहीं हैं।

वापसी

इस्लाम से दोबारा हिंदू धर्म में वापसी पर भी नहीं मिलेगा लाभ

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि कोई व्यक्ति इस्लाम में धर्म परिवर्तन करने बाद फिर से हिंदू धर्म में वापसी करता है तो स्वतः ही अपने धर्मांतरण से पहले की पिछड़ेपन की स्थिति को पुनः प्राप्त करने का हकदार नहीं होगा।

कोर्ट ने कहा , "धर्मांतरण से पहले व्यक्ति की सामाजिक पिछड़ापन की स्थिति, धर्मांतरण के बाद उसे किसी अन्य अधिसूचित पिछड़े वर्ग की सदस्यता प्रदान करने का कानूनी आधार नहीं बन सकती।"

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मामला

क्या है धर्मांतरण और आरक्षण का मामला?

तमिलनाडु के थूथुकुडी में हिंदू परमासिवम 2015 में इस्लाम धर्म अपनाकर समीर अहमद बन गए। इस्लाम के अनुसार शादी की और सामुदायिक प्रमाणपत्र के लिए आवेदन किया।

तहसीलदार ने उनका आवेदन खारिज कर दिया, तो वे हाई कोर्ट पहुंच गए। जहां भी उनकी अपील खारिज हो गई और कोर्ट ने पिछड़े वर्ग के मुसलमानों को मान्यता देने वाले राज्य सरकार के 2024 के आदेश को असंवैधानिक करार दिया।

कोर्ट ने कहा कि आरक्षण के उद्देश्य से धर्मांतरण नहीं हो सकता।

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जानकारी

तमिलनाडु सरकार ने मार्च 2024 में निकाला था आदेश

तमिलनाडु में 9 मार्च, 2024 को एक सरकारी आदेश जारी किया गया, जिसमें पिछड़े वर्गों, अति पिछड़े वर्गों, गैर-अधिसूचित समुदायों और अनुसूचित जातियों के व्यक्तियों को इस्लाम धर्म अपनाने के बाद पिछड़े वर्ग के मुसलमानों के रूप में माने जाने की अनुमति दी गई थी।

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