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सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन से जुड़े मामलों पर सुनवाई 15 अक्टूबर तक स्थगित की
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन से जुड़े मामलों पर सुनवाई 15 अक्टूबर तक स्थगित की

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन से जुड़े मामलों पर सुनवाई 15 अक्टूबर तक स्थगित की

लेखन गजेंद्र
Oct 13, 2026
03:15 pm

क्या है खबर?

सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ चल रहे विरोध-प्रदर्शन से जुड़े मामलों पर सुनवाई को 15 अक्टूबर तक स्थगित कर दिया है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और वी मोहना की पीठ को मंगलवार को मामलों से संबंधित अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई करनी थी। सुनवाई को न्यायमूर्ति मोहना के खराब स्वास्थ्य के कारण टाला गया, जिसमें पक्षों ने भी कोई आपत्ति नहीं जताई।

याचिका

महिला पत्रकारों से मारपीट से जुड़ी याचिका पर दिल्ली पुलिस तलब

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने नेटवर्क ऑफ विमेन इन मीडिया, इंडिया (NWMI) द्वारा दायर याचिका का उल्लेख किया, जिस पर CJI ने मामले का अवलोकन किया।

याचिका में महिलाओं ने प्रदर्शन कवर करने वाले पत्रकारों पर हुए हमलों नाराजगी जताई थी और महिला पत्रकारों के लिए सुरक्षा उपायों की मांग की थी।

CJI ने मामले पर जवाब देने के लिए दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी को उपस्थित रहने और आरोप का औचित्य साबित करने को कहा है।

याचिका

चुनाव आयुक्तों की प्रतिरक्षा पर भी नोटिस जारी

पीठ ने लोकतांत्रिक सुधार संघ द्वारा दायर नई याचिका पर भी नोटिस जारी किया।

इसमें CEC और चुनाव आयुक्त अधिनियम 2023 की धारा-16 को चुनौती दी गई है, जो आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन में की गई कार्रवाइयों के लिए चुनाव आयोगों को प्रतिरक्षा देती है।

इसके अलावा, कोर्ट ने अपने 9 अक्टूबर के निर्देशों की अवमानना ​ और डॉ मेनका गुरुस्वामी की याचिका के जवाब के संबंध में अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने के लिए 15 अक्टूबर तक समय दिया है।

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अवमानना

सुप्रीम कोर्ट के आदेश की हुई अवमानना

कम्युनिस्ट पार्टी के नेता एमए बेबी और अन्य याचिकाकर्ताओं ने ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन से पहले केंद्र द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों को चुनौती देते हुए कोर्ट का रुख किया था।

इस पर CJI की पीठ ने 9 अक्टूबर को आदेश दिया कि केंद्र दिल्ली में ट्रेन और मेट्रो को पूरी तरह प्रतिबंधित न करें, लेकिन इसका पालन नहीं हुआ।

इसके बाद, अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने अवमानना ​​याचिका दायर की। कई अन्य याचिकाएं भी दायर हुई।

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