ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, केंद्र और चुनाव आयोग को नोटिस
क्या है खबर?
सुप्रीम कोर्ट ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनर्निरिक्षण (SIR) के दौरान 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए जाने और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार द्वारा किए गए कथित एकतरफा फैसलों के खिलाफ दायर जनहित याचिका (PIL) पर केंद्र सरकार, चुनाव आयोग और ज्ञानेश कुमार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहाना की पीठ ने अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी द्वारा दायर याचिकाओं पर यह नोटिस जारी किया है।
निलंबन
कोर्ट ने ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने से किया इनकार
याचिकाकर्ताओं के CEC ज्ञानेश कुमार के निलंबन और आदेशों पर अंतरिम रोक की तत्काल मांग करने पर CJI सूर्यकांत की पीठ ने एकतरफा आदेश देने से इनकार कर दिया।
कोर्ट ने कहा, "हम किसी अखबार की रिपोर्ट के आधार पर आदेश पारित नहीं कर सकते हैं, और यह तय करने से पहले कि क्या CEC ज्ञानेश कुमार ने अकेले ही उन शक्तियों का प्रयोग किया है जो संवैधानिक रूप से पूरे बहुसदस्यीय चुनाव आयोग के लिए निर्धारित हैं।"
टिप्पणी
कोर्ट ने कही प्रामाणिक जानकारी और आधिकारिक जवाब की जांच करने की बात
कोर्ट ने आगे कहा, "हम पहले इन गंभीर आरोपों पर चुनाव आयोग और अन्य प्रतिवादियों से प्रमाणित जानकारी और आधिकारिक जवाब चाहते हैं। हम यह मानकर चलते हैं कि एक संवैधानिक प्राधिकरण कानून के अनुसार ही कार्य करेगा, लेकिन, यदि बाद में यह पाया जाता है कि कोई भी निर्णय कानून के अनुरूप या आम सहमति के बिना एकतरफा अंदाज में लिया गया था, तो हमारे पास उन सभी आदेशों को पूरी तरह रद्द करने की शक्ति है।"
इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने किया संशोधित फॉर्म-6 को मंजूरी देने से इनकार
याचिका में नए मतदाताओं के लिए फॉर्म-6 में बिना किसी विधायी संशोधन के अनिवार्य पैतृक शर्त (पिछला SIR लिंकेज) जोड़ने पर भी आपत्ति जताई गई है।
इसको लेकर चुनाव आयोग ने कहा था कि संशोधित प्रारूप को सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी से ही लागू किया गया था।
इस पर अब कोर्ट ने कहा, "फॉर्म-6 में किए गए किसी भी संशोधन को हमने मंजूरी नहीं दी है। जब रिकॉर्ड पेश होगा, तो हम यह देखना चाहेंगे कि किसने संशोधन किया है।"
विवाद
क्या है पूरा विवाद?
लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, यह मामला राकेश कुमार सिंह और अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी द्वारा दायर दो अलग-अलग याचिकाओं से जुड़ा है।
याचिकाओं में मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए दावा किया गया कि अक्टूबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच चुनाव आयोग के नाम पर करीब 14 बड़े फैसले एकतरफा तरीके से लिए गए।
आरोप है कि ये फैसलों पर आयोग के 2 अन्य आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने भी आपत्तियां दर्ज कराई थीं।
दलील
याचिकाकर्ताओं के वकील ने क्या दी दलील?
याचिकाकर्ताओं की वकील मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि अनुच्छेद 324 के तहत शक्तियां पूरे आयोग के पास निहित हैं, न कि अकेले CEC के पास। आज CEC एक संवैधानिक प्राधिकारी के रूप में उस कानून के बिल्कुल विपरीत काम कर रहे हैं जिसके तहत उनकी नियुक्ति हुई है।
याचिकाओं में देश के 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR के के तहत करीब 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। इनकी फॉरेंसिक ऑडिट और जांच होनी चाहिए।
मांग
याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से क्या-क्या मांग की हैं?
याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से चुनाव आयोग की बैठकों के एजेंडे, नोट शीट्स और IT एक्सेस रिकॉर्ड को जांच के लिए कोर्ट के संरक्षण में सुरक्षित करने, सुप्रीम कोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र न्यायिक जांच आयोग या विशेष जांच दल (SIT) का गठन करने और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 32 के तहत आधिकारिक कर्तव्यों के उल्लंघन के लिए दोषी अधिकारियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कर मुकदमा चलाए जाने की मांग की है।