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लद्दाख में देश की पहली हाई-एल्टीट्यूड स्नो लेपर्ड वाइल्डलाइफ सफारी की हो गई शुरूआत, जानिए खासियत
लद्दाख में शुरू हुई हाई-एल्टीट्यूड स्नो लेपर्ड वाइल्डलाइफ सफारी

लद्दाख में देश की पहली हाई-एल्टीट्यूड स्नो लेपर्ड वाइल्डलाइफ सफारी की हो गई शुरूआत, जानिए खासियत

लेखन अंजली
Oct 08, 2026
05:04 pm

क्या है खबर?

लद्दाख में पर्यटकों के लिए भारत की पहली हाई-एल्टीट्यूड वाइल्डलाइफ सफारी शुरू की गई है, जिसके जरिए हिम तेंदुओं को देखना आसान हो सकता है। इस सफारी को अगस्त में मंजूरी मिली थी और अब इसकी शुरूआत हो चुकी है। अनुभवी स्थानीय ड्राइवर और वाइल्डलाइफ गाइड पर्यटकों के साथ जाएंगे, जबकि गाड़ियां वाइल्डलाइफ इलाकों में तय रास्तों पर चलेंगी। सफारी के तय रास्तों में फिलहाल रुम्बक, शांग और उले शामिल हैं क्योंकि ये इलाके स्नो लेपर्ड टूरिज्म से जुड़े हैं।

प्रोजेक्ट

सफारी के पहले चरण में सिर्फ 3 जगहों पर चलेंगी गाड़ियां

शुरुआत में चुनी गई 3 जगहें सफारी प्रोजेक्ट के पहले चरण का हिस्सा हो सकती हैं।

अधिकारी लद्दाख के कई दूसरे इलाकों में भी रास्तों पर विचार कर रहे हैं, जिनमें हेमिस नेशनल पार्क, चांगथांग वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी, काराकोरम वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी, नुब्रा, जंस्कार, करगिल और द्रास शामिल हैं।

इसके जरिए पर्यटक लद्दाख के खूबसूरत नजारों का आनंद ले सकेंगे, लेकिन पहाड़ों के नाजुक इलाकों में पर्यटकों की आवाजाही को सावधानी से संभालने की जरूरत भी बढ़ जाएगी।

संचालन

इस सफारी को कैसे संचालित किया जाएगा?

प्रशासन ने कहा कि जब अगस्त में इस प्रोजेक्ट को मंजूरी मिली थी तो इसकी शुरूआत करने के कारणों में गैर-कानूनी ऑफ-रोडिंग कम करना और वाइल्डलाइफ को होने वाली परेशानी को सीमित करना शामिल था।

प्रशासन ने आगे बताया, 'उम्मीद है कि स्थानीय लोग ड्राइवर, वाइल्डलाइफ गाइड और नेचर इंटरप्रेटर के तौर पर काम करेंगे। इसके अतिरिक्त लगभग 20 स्थानीय युवाओं को बर्ड-वॉचिंग की ट्रेनिंग दी जा रही है और कुछ वाइल्डलाइफ साइट्स पर बर्ड-वॉचिंग हाइड्स बनाने की योजना है।'

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मकसद

संरक्षण को स्थानीय आजीविका से जोड़ना है इस प्रोजेक्ट का मकसद

इस प्रोजेक्ट का मकसद संरक्षण को स्थानीय आजीविका से जोड़ना है ताकि समुदायों को इलाके की वाइल्डलाइफ और उनके रहने की जगहों को बचाने का सीधा आर्थिक कारण मिल सके।

लद्दाख में स्नो लेपर्ड टूरिज्म पारंपरिक रूप से स्थानीय ट्रैकर्स, गांव के होमस्टे और छोटे समूहों पर निर्भर रहा है। ऐसे में एक औपचारिक सफारी सिस्टम से पर्यटकों के लिए यह अनुभव ज्यादा हो सकता है और साथ ही स्थानीय रोजगार के नए अवसर भी बन सकते हैं।

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शुरूआत

6 गाड़ियों से की गई है शुरूआत

यह सफारी अभी सीमित स्तर पर शुरू हो रही है, जिसमें रुम्बक, शांग और उले में 6 गाड़ियां चलेंगी।

हालांकि, अभी किराए, बुकिंग के तरीके और सफारी का समय जैसी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह प्रोजेक्ट लद्दाख में इसलिए शुरू किया गया है क्योंकि यहां बड़ी संख्या में हिम तेंदुएं मौजूद हैं।

देश में हिम तेंदुओं की संख्या लगभग 718 है, जिसमें से 477 लद्दाख में हैं।

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