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विरोध-प्रदर्शनों पर UN रिपोर्ट का भारत ने दिया जवाब, कहा- ये अफवाहों पर आधारित
भारत ने युवा प्रदर्शनों पर UN के विशेष प्रतिवेदक की रिपोर्ट को खारिज किया है

विरोध-प्रदर्शनों पर UN रिपोर्ट का भारत ने दिया जवाब, कहा- ये अफवाहों पर आधारित

लेखन आबिद खान
Oct 17, 2026
12:25 pm

क्या है खबर?

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) समेत विपक्ष के विरोध-प्रदर्शनों को लेकर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार विशेषज्ञ की रिपोर्ट का भारत ने जवाब दिया है। भारत ने रिपोर्ट को खारिज करते हुए कहा कि ये आरोप गुमनाम और बिना पुष्टि किए गए बयानों पर आधारित हैं। संयुक्त राष्ट्र (UN) में भारतीय राजनयिक अनुज स्वरूप ने कहा, "ये आरोप गुमनाम और असत्यापित जानकारियों पर आधारित हैं। भारत का संविधान हर नागरिक को ये स्वतंत्रताएं प्रदान करता है।"

बयान

स्वरूप बोले- भारत में हर नागरिक को अभिव्यक्ति की आजादी

स्वरूप ने कहा, "भारत ने शांतिपूर्ण सभा और संगठन की स्वतंत्रता पर विशेष प्रतिवेदक (स्पेशल रैपोर्टियर) की रिपोर्ट पर ध्यान दिया है। भारत में हमारे संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत हर नागरिक को ये स्वतंत्रताएं, साथ ही बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता दी गई हैं। इनकी सुरक्षा एक स्वतंत्र न्यायपालिका, एक स्वतंत्र प्रेस और एक सशक्त राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा की जाती है। अफवाहों के आधार पर रिपोर्ट बनाकर UN में पेश कर दिया गया है।"

विश्वसनियता

खत्म हो गई UN की विश्वसनियता- स्वरूप

स्वरूप ने आगे कहा, "गुमनाम और असत्यापित दावों के आधार पर दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी पर इस तरह का व्यापक आरोप लगाना कोई सबूत नहीं है। यह सिर्फ एक अफवाह है, जिसे UN रिपोर्ट का रूप देकर पेश किया गया है। हमारी प्रतिनिधिमंडल इसे पूरी तरह खारिज करता है। रिपोर्ट लिखने का यह मनमाना तरीका ही वह मुख्य कारण है, जिसकी वजह से संयुक्त राष्ट्र और उसके संस्थानों की विश्वसनीयता खत्म हो गई है।"

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बड़ी बातें

स्वरूप के भाषण की बड़ी बातें

सरकार ने युवाओं के साथ सकारात्मक बातचीत की है और परीक्षा में होने वाली धांधली को रोकने के लिए कदम उठाए हैं।

विकसित भारत युवा नेतृत्व संवाद के तहत राष्ट्रीय प्राथमिकताओं में योगदान देने के लिए 50 लाख से अधिक युवा साथ आए।

कौन सा दमनकारी देश ऐसा होता है, जहां युवा एक व्यंग्यात्मक राजनीतिक आंदोलन शुरू करते हैं, राजधानी तक मार्च निकालते हैं और फिर वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री उनके साथ मेज पर बैठकर बात करते हैं?

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मामला

क्या है मामला?

दरअसल, संयुक्त राष्ट्र की विशेष दूत जीना रोमेरो ने हाल ही में एक रिपोर्ट में दावा किया था कि भारत में युवाओं को मानसिक स्वास्थ्य या लैंगिक न्याय पर बात करने के कारण बदले की कार्रवाई या कलंक का सामना करना पड़ता है।

इसी का अब भारत ने जवाब दिया है।

रोमेरो कोलंबिया के मानवाधिकार समर्थक हैं और शांतिपूर्ण सभा करने तथा संगठन बनाने की स्वतंत्रता के अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र के विशेष प्रतिवेदक हैं।

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