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दिल्ली का जंतर-मंतर खगोल वेधशाला से विरोध प्रदर्शन राजधानी कैसे बना? जानिए पूरा इतिहास
दिल्ली का जंतर-मंतर विरोध प्रदर्शनों का प्रमुख केंद्र बन गया था

दिल्ली का जंतर-मंतर खगोल वेधशाला से विरोध प्रदर्शन राजधानी कैसे बना? जानिए पूरा इतिहास

Oct 12, 2026
03:26 pm

क्या है खबर?

दिल्ली का ऐतिहासिक जंतर-मंतर अब आधिकारिक रूप से विरोध प्रदर्शनों का केंद्र नहीं रहा है। केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस द्वारा सुरक्षा कारणों और हालिया नागरिक आंदोलनों के चलते इसे प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटा दिया है। अब यहां किसी भी प्रकार के धरने या प्रदर्शन पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई है। ऐसे में आइए आइए जानते हैं कि खगोल वेधशाला के रूप में स्थापित यह स्थल आखिर कैसे विरोश प्रदर्शनों की राजधानी बन गया था।

जंतर-मंतर

क्या है जंतर-मंतर और कब हुई थी इसकी स्थापना?

जंतर-मंतर के इतिहास की शुरुआत साल 1724 में हुई थी। जयपुर के महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय ने मुगल सम्राट मोहम्मद शाह के निर्देश पर खगोलीय गणनाओं को सटीक बनाने के लिए इसका निर्माण करवाया था।

यहां चूने और गारे की मदद से सम्राट यंत्र, जयप्रकाश यंत्र और राम यंत्र जैसे विशाल उपकरण स्थापित किए गए थे, जो सूर्य और अन्य खगोलीय पिंडों की स्थिति तथा समय को मिनटों और सेकंडों की सटीकता के साथ मापने का काम करते थे।

नाम

जंतर-मंतर कैसे रखा गया इसका नाम?

यह नाम संस्कृत के दो शब्दों यंत्र और मंत्र से मिलकर बना है। यंत्र का अर्थ है उपकरण और मंत्र, जो इस संदर्भ में गणना या सूत्र को दर्शाता है।

जंतर-मंतर का सामान्य अर्थ खगोलीय गणनाओं में प्रयुक्त उपकरण होता है।

जय सिंह ने भारत भर में दिल्ली, जयपुर, उज्जैन, वाराणसी और मथुरा में 5 वेधशालाएं बनवाई थीं।

मथुरा की वेधशाला अब अस्तित्व में नहीं है, जबकि जयपुर का जंतर-मंतर यूनेस्को का विश्व धरोहर स्थलाें की सूची में शामिल है।

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सवाल

जंतर-मंतर विरोध प्रदर्शनों की राजधानी कैसे बना?

आजादी के बाद दशकों तक दिल्ली के कुछ सबसे बड़े राजनीतिक प्रदर्शन इंडिया गेट के पास बोट क्लब के लॉन में आयोजित किए गए, जो सरकार के प्रशासनिक मुख्यालय के करीब है।

1988 में किसान नेता महेंद्र सिंह टिकैत ने वहां एक विशाल आंदोलन का नेतृत्व किया, जिसमें 5 लाख किसान एकत्रित हुए और उन्होंने बिजली माफी समेत कई अन्य जायज मांगें उठाई थी।

हफ्तों तक चले इस प्रदर्शन के कारण पूरी लुटियंस दिल्ली ठप हो गई थी।

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प्रतिबंध

1993 के प्रतिबंध ने जंतर-मंतर को बनाया नया विकल्प

सुरक्षा चिंताओं और संसद भवन के साथ राष्ट्रपति भवन के ठीक सामने होने वाले भारी व्यवधान को देखते हुए सरकार और प्रशासन ने 1993 में बोट क्लब पर प्रदर्शनों करने पर हमेशा के लिए प्रतिबंध लगा दिया।

इसके विकल्प के रूप में संसद मार्ग के नजदीक स्थित जंतर-मंतर रोड को नए प्रदर्शन स्थल के रूप में चिह्नित किया गया था।

समय के साथ जंतर-मंतर भारत का सबसे प्रसिद्ध विरोध स्थल बन गया, जबकि बड़ी रैलियां रामलीला मैदान में होने लगीं।

जमाव

प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पर ही क्यों एकत्र होते हैं?

इसका स्थान ही सबसे बड़ा कारण है। जंतर-मंतर मध्य नई दिल्ली में स्थित है, जो संसद भवन से लगभग डेढ़ किलोमीटर दूर और महत्वपूर्ण सरकारी संस्थानों के निकट है।

देश के राजनीतिक नेतृत्व से इसकी निकटता इसे उन समूहों के लिए एक अत्यधिक दृश्यमान स्थान बनाती है जो अपनी मांगों की ओर ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं।

यहां होने वाला प्रदर्शन राष्ट्रीय मीडिया कवरेज, राजनीतिक ध्यान और सार्वजनिक बहस को आकर्षित कर सकते हैं।

आंदोलन

जंतर-मंतर पर हुए ये प्रमुख ऐतिहासिक आंदोलन

साल 2011 में अनुभवी कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने भ्रष्टाचार विरोधी कानूनों को मजबूत बनाने और एक स्वतंत्र लोकपाल संस्था के गठन के लिए जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल शुरू की।

यह दशक के सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक आंदोलनों में से एक बन गया।

इसी तरह 2012 में दिल्ली गैंगरेप के बाद देश भर के युवाओं और छात्रों ने यहां हफ्तो तक प्रदर्शन किया, जिसके कारण देश के आपराधिक कानूनों में बड़े बदलाव करने पर मजबूर होना पड़ा था।

अन्य

जंतर-मंतर पर हुए ये अन्य प्रमुख विरोध प्रदर्शन

साल 2017 में सूखे से राहत और कृषि ऋण माफी की मांग करते हुए तमिलनाडु के 80 से अधिक किसान जंतर-मंतर पहुंचे थे।

उनके 41 दिनों के प्रदर्शन ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया, जिसमें उन्होंने आत्महत्या करने वाले किसानों की खोपड़ियों को भी अपने साथ रखा था।

इसके बाद साल 2023 में भारतीय कुश्ती महासंघ के तत्कालीन अध्यक्ष बृज भूषण शरण सिंह के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोपों के विरोध में प्रमुख भारतीय पहलवानों ने यहीं प्रदर्शन किया था।

प्रतिबंध

क्या जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन करना कभी प्रतिबंधित था?

अक्टूबर 2017 में राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (NGT) ने आसपास के निवासियों द्वारा ध्वनि प्रदूषण, स्वच्छता समस्याओं और व्यवधान के बारे में शिकायतों के बाद जंतर मंतर रोड पर प्रदर्शनों पर प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया था।

हालांकि, इस प्रतिबंध को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी।

23 जुलाई, 2018 को कोर्ट ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के महत्व को स्वीकार करते हुए पूर्ण प्रतिबंध को रद्द कर दिया और अधिकारियों को उचित नियम लागू करने की अनुमति भी दी।

आदेश

गृह मंत्रालय ने अब क्या जारी किए हैं आदेश?

लगातार बढ़ते सुरक्षा खतरों, ट्रैफिक की विकट समस्या और हाल ही में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बड़े आंदोलन के कारण कानून-व्यवस्था पर आए दबाव को देखते हुए गृह मंत्रालय और दिल्ली पुलिस ने इस स्थल को आधिकारिक रूप से प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटा दिया है।

प्रशासन ने जंतर-मंतर के विकल्प के रूप में रामलीला मैदान, बुराडी मैदान और CBD ग्राउंड को अधिसूचित किया है, ताकि लोकतांत्रिक अधिकारों और नागरिक सुरक्षा के बीच संतुलन बनाया जा सके।

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