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फिल्म 'काला हिरण' मामला: सलमान खान को झटका, हाई कोर्ट ने पूछा- दिल्ली में केस क्यों?
'काला हिरण' पर कानूनी लड़ाई तेज

फिल्म 'काला हिरण' मामला: सलमान खान को झटका, हाई कोर्ट ने पूछा- दिल्ली में केस क्यों?

Oct 09, 2026
03:10 pm

क्या है खबर?

फिल्म 'काला हिरण: बैटल फॉर लेगेसी' पर विवाद जारी है। इसकी रिलीज रोकने की मांग कर रहे अभिनेता सलमान खान को बड़ा झटका लगा है। दिल्ली हाईकोर्ट ने फिल्म के निर्माता की उस अर्जी पर सलमान को नोटिस जारी किया है, जिसमें मुकदमे को खारिज करने की मांग की गई है। निर्माता का तर्क है कि इस मामले पर सुनवाई करने का दिल्ली हाई कोर्ट के पास क्षेत्रीय अधिकार ही नहीं है।

नोटिस

हाई कोर्ट में जानी के वकील की दलील पर नोटिस जारी

न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने निर्माता अमित जानी की अर्जी पर सुनवाई करते हुए सलमान से जवाब मांगा है और मामले की अगली सुनवाई 16 दिसंबर तय की है।

जानी के वकील ने दलील दी कि न तो सलमान और ना ही उनके मुवक्किल दिल्ली हाई कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में रहते हैं या व्यवसाय करते हैं। सलमान मुंबई में रहते हैं, जबकि अमित जानी उत्तर प्रदेश के मेरठ के निवासी हैं।

दलील

सिर्फ दिल्ली में पोस्टर-टीजर रिलीज होना केस का आधार नहीं

अदालत में दलील दी गई कि फिल्म का टीजर, पोस्टर या प्रोमोशनल कंटेंट दिल्ली समेत पूरे देश में उपलब्ध होने मात्र से दिल्ली हाई कोर्ट को इस केस की सुनवाई का अधिकार नहीं मिल जाता।

याचिका में आगे कहा गया कि सलमान की शिकायत में ऐसा कोई दावा नहीं है कि फिल्म या उसके प्रचार सामग्री से विशेष रूप से दिल्ली की जनता को निशाना बनाया गया है और ना ही अभिनेता को दिल्ली में कोई अलग नुकसान पहुंचा है।

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आरोप

सलमान का निर्माता पर बड़ा आरोप

अपनी याचिका में सलमान ने कहा है कि निर्माता ने बार-बार सार्वजनिक तौर पर ये बात कबूल की है कि यह फिल्म उन पर और अक्टूबर 1998 के काला हिरण मामले की अदालती कार्रवाई पर आधारित है।

सलमान का आरोप है कि फिल्म के प्रोमोशनल कंटेंट में उनके नाम, चेहरे, चलने-बोलने के अंदाज, खास व्यक्तिगत पहचान, मशहूर फिल्मों और उनसे जुड़ी चर्चित घटनाओं के जरिए साफ तौर पर उनकी ही छवि दिखाई गई है।

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मौलिक अधिकार

सलमान ने उठाई निष्पक्ष ट्रायल और मौलिक अधिकारों की बात

याचिका के मुताबिक 4 में से 3 मामलों में बरी होने और हाई कोर्ट व सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं लंबित होने के बावजूद इस घटना का नाटकीय रूपांतरण दिखाना उनके निष्पक्ष सुनवाई के मौलिक अधिकार का हनन है।

अदालत को बताया गया कि फिल्म के टीजर और प्रोमोशनल कंटेंट के जरिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से यह संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि अभिनेता उन अपराधों के दोषी हैं, जो अभी भी अदालत में विचाराधीन हैं।

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