जावेद अख्तर का तंज- 99 फीसदी लोग उसी धर्म में मरते हैं, जिसमें जन्म लेते हैं
क्या है खबर?
मशहूर गीतकार और लेखक जावेद अख्तर ने एक बार फिर धार्मिक कट्टरता और परंपराओं पर तीखा हमला बोला है। एक बातचीत में उन्होंने कहा कि दुनिया के 99 फीसदी लोग उसी धर्म में मर जाते हैं, जिसमें वे जन्म लेते हैं। जावेद ने सवाल उठाया कि क्या विरासत में मिली आस्था वाकई किसी का अपना सोच-समझकर लिया गया फैसला है? उनके मुताबिक, लोग अक्सर बिना सोचे-समझे धर्म को अपना लेते हैं, क्योंकि इसमें उन्हें एक झूठी सांत्वना मिलती है।
बयान
धार्मिक मान्यताएं या झूठी तसल्ली?
सौरभ द्विवेदी संग बातचीत में जावेद ने स्वीकार किया कि मुश्किल वक्त में धर्म लोगों को सुकून और मानसिक शांति जरूर देता है। हालांकि, उन्होंने सवाल उठाया कि आस्था से मिलने वाली यह भावनात्मक राहत क्या इस बात का सबूत है कि धार्मिक मान्यताएं सच हैं? लेखक इसे एक कृत्रिम या बनावटी आधार मानते हैं। उन्होंने समझाया कि लोग अक्सर किसी ईश्वर या अदृश्य शक्ति के विचार से सिर्फ इसलिए चिपके रहते हैं क्योंकि इससे उन्हें तसल्ली मिलती है।
भरोसा
जावेद ने ऐसे समझाया भगवान पर हमारे विश्वास का सच
जावेद ने इसे एलन मस्क का उदाहरण देकर समझाया।
वो बाेले, "कोई व्यक्ति खुद को ये यकीन दिला ले कि एलन मस्क उसका भाई है और वो उसे भारी रकम भेजने वाला है तो बिना किसी ठोस वजह के भी ये सोच उसे सुरक्षित महसूस कराएगी। दिल से मान लीजिए कि अगले महीने वो आपको 16,600 करोड़ से 17,000 करोड़ रुपये भेजेगा और खुश रहिए। ये सोचकर कितनी तसल्ली मिलेगी कि एलन मस्क मेरा भाई है? आप खुश रहेंगे न?"
प्रतिक्रिया
क्या धर्म और आस्था वाकई हमारा अपना चुना हुआ फैसला है?
जावेद ने सवाल उठाया कि क्या आस्था कभी वाकई एक सचेत और सोच-समझकर लिया गया फैसला होती है?
उन्होंने ध्यान दिलाया कि ज्यादातर लोग बस उसी धर्म का पालन करते हैं, जिसमें वे बड़े होते हैं। इस बात को रेखांकित कर कि 99 प्रतिशत लोग उसी धर्म में मरते हैं जिसमें वे पैदा होते हैं, उन्होंने सवाल किया कि विश्वास आखिर कितनी बार खुद स्वतंत्र रूप से बनाए जाते हैं, बजाय इसके कि वे बचपन से विरासत में मिले हों।
आस्था
हम व्यक्ति पर नहीं, तर्क और विचार पर भरोसा करते हैं
जावेद बोले, "हम किसी व्यक्ति नहीं, बल्कि विचार, तर्क और विवेक पर भरोसा करते हैं। इंसान कल अपनी बात बदल सकता है, पर विचार नहीं बदलता, वहीं धार्मिक व्यक्ति किसी इंसान पर अंधा विश्वास करता है। उसके माता-पिता ने उससे जो भी कहा, वो शायद उन पर भरोसा करता है या फिर उसे कोई संत मिल जाता है। दुनिया में 10 प्रमुख धर्म हैं और ये कहना बिल्कुल बकवास है कि वे सब एक समान हैं, वे सभी अलग हैं।"
जानकारी
भारतीय सिनेमा में जावेद की यात्रा
जावेद भारतीय सिनेमा और साहित्य के सबसे प्रभावशाली गीतकारों और लेखकों में से एक हैं, जिनका करियर 5 दशकों से भी लंबा रहा है। उन्होंने कवि, गीतकार और पटकथा लेखक के रूप में हिंदी सिनेमा की कई यादगार कहानियों, पात्रों और गीतों को गढ़ा है।