प्रधानमंत्री मोदी के समर्थन में उतरे अनुपम खेर, बोले- शोर मचाने से बात सच नहीं होती
क्या है खबर?
अभिनेता अनुपम खेर ने विरोध प्रदर्शनों के दौरान हो रही हिंसा, तोड़फोड़ और अभद्र भाषा का विरोध किया है। उन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने का समर्थन करते हुए कहा कि असहमति जताने का हक सभी को है, लेकिन मर्यादा नहीं लांघनी चाहिए। अनुपम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थकों से अपील की कि वे बिना किसी उकसावे या गाली-गलौज के, आत्मविश्वास और शालीनता के साथ अपनी बात और विचार जनता के सामने रखें।
पोस्ट
अपनी नजरों में सही रहना जरूरी
अनुपम ने इंस्टाग्राम पर वीडियो साझा कर लिखा, 'लोकप्रिय बनने से ज्यादा अपनी नजरों में सही रहना जरूरी है। विदेश में रहकर भारत के प्रदर्शनों को देखने के बाद उन्होंने अपनी बात रखी। खेर ने लिखा, "कभी-कभी बोलना बहुत जरूरी होता है, भले आपकी बात पसंद न आए। प्रदर्शनों के पीछे की कहानी, मकसद, सत्य और षड्यंत्र पर मैंने जो महसूस किया, वही साझा कर रहा हूं।" उन्होंने स्पष्ट किया कि वह आलोचना के डर से चुप नहीं बैठेंगे।'
भाषा
प्रदर्शनकारियों की अभद्र भाषा पर बोले अनुपम
अनुपम बोले कि देश में शांति और तरक्की चाहने वालों का बोलना भी उतना ही जरूरी है, जितना विरोधियों का। उन्होंने मोदी के लिए इस्तेमाल किए गए अपशब्दों पर दुख जताया।
खेर ने कहा, "वो हमारे देश के प्रधानमंत्री हैं और उम्र में बड़े हैं। मेरे विचार में वो देश का नेतृत्व बेहतरीन तरीके से कर रहे हैं। असहमति और आलोचना अपनी जगह सही है, लेकिन अपनी बात रखने के लिए मर्यादा लांघने और गाली-गलौज की आखिर क्या जरूरत है?"
बयान
मोदी का विरोध जायज, पर समर्थकों की आवाज भी दबाई न जाए
मतदाता सूची में गड़बड़ी और वोट चोरी के आरोपों को लेकर देश में व्यापक प्रदर्शन हो रहे हैं, जहां प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
इस माहौल के बीच अभिनेता अनुपम बोले कि प्रधानमंत्री मोदी की आलोचना करना और सरकारी फैसलों को चुनौती देना लोकतंत्र का बुनियादी अधिकार है।
उन्होंने कहा कि जो लोग सरकार का समर्थन करते हैं, उन्हें भी खुलकर अपने विचार व्यक्त करने की पूरी आजादी होनी चाहिए।
अधिकार
समर्थकों को भी मिले बोलने का हक- अनुपम
अनुपम अमेरिका, कनाडा के 18 शहरों में अपने नाटक 'जाने पहचाने अनजाने' के अंतिम चरण के दौरे पर हैं।
इस दौरान भारतीय समुदाय से मिले प्यार और सम्मान से वो काफी भावुक दिखे। अपने इंस्टाग्राम पोस्ट के साथ उन्होंने स्पष्ट किया कि वो सिर्फ आलोचना से बचने के लिए चुप नहीं बैठना चाहते।
उनका कहना है कि अगर प्रदर्शनकारियों की बात सुनी जानी चाहिए तो उनसे असहमत लोगों और सरकार के समर्थकों की आवाज सुनना भी उतना ही जरूरी है।
आहत
हालिया प्रदर्शन के वीडियो देखकर गुस्साए अनुपम
हालिया प्रदर्शनों के वीडियो देखकर अनुपम ने गहरा दुख और गुस्सा जताया।
उन्होंने कहा कि सरकार और प्रधानमंत्री मोदी से असहमति दर्ज कराना हक है, लेकिन इसके लिए प्रधानमंत्री, उनकी दिवंगत माताजी और महिला पुलिसकर्मियों के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल क्यों?
एक नागरिक के तौर पर अभिनेता ने कहा कि उन्होंने मोदी के 12 सालों के काम पर भरोसा करके उन्हें वोट दिया था और आज भी उनका विश्वास अटूट है। विरोध का मतलबे गाली-गलौज बिल्कुल नहीं होना चाहिए।
दो टूक
चुनावी धांधली के दावों पर अनुपम की नसीहत
अनुपम बोले, "आपको अपनी राय का अधिकार है और मुझे अपनी। आप सरकार का विरोध करने के लिए स्वतंत्र हैं और मैं आपके तरीकों का। लोकतंत्र में सबसे ज्यादा शोर मचाने वाली आवाज ही सही नहीं होती।"
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग पर लगे धांधली के आरोपों पर अनुपम बोले कि आरोप लगाने वाले ठोस सबूत पेश करें, संवैधानिक रास्ते अपनाएं और निष्पक्ष जांच की मांग करें, क्योंकि बिना सबूतों के आरोपों का कोई वजूद नहीं होता।