माइक्रोसॉफ्ट ने ग्रीन कार्ड प्रोग्राम से सस्पेंड होने पर दी सफाई, कहा- ज्यादातर कर्मचारी अमेरिकी नागरिक
क्या है खबर?
अमेरिका में बीते दिन (9 अक्तूबर) ग्रीन कार्ड से जुड़े कार्यक्रम से निलंबित किए जाने के बाद माइक्रोसॉफ्ट ने अपनी भर्ती प्रक्रिया का बचाव किया है। कंपनी ने कहा कि अमेरिका में उसके ज्यादातर कर्मचारी अमेरिकी नागरिक हैं। साथ ही, कंपनी ने स्पष्ट किया कि पिछले वित्त वर्ष में जमा किए गए करीब 6,000 H-1B वीजा आवेदनों में से 80 प्रतिशत मौजूदा कर्मचारियों का वीजा बढ़ाने या उनकी स्थिति बदलने के लिए थे।
कार्रवाई
ग्रीन कार्ड कार्यक्रम से क्यों हुई कार्रवाई?
अमेरिकी श्रम विभाग ने माइक्रोसॉफ्ट और एडोब समेत कई टेक कंपनियों को स्थायी श्रम प्रमाणन (PERM) कार्यक्रम से निलंबित कर दिया है।
विभाग के मुताबिक, इन सभी कंपनियों के खिलाफ चल रही कई संघीय जांचों के कारण यह कदम उठाया गया है। इस कार्यक्रम के तहत कंपनियां विदेशी कर्मचारियों के लिए ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया आगे बढ़ाती हैं।
निलंबन के बाद विभाग इन कंपनियों के नए आवेदन स्वीकार या उन पर कार्रवाई नहीं करेगा।
आरोप
क्या है आरोप?
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने माइक्रोसॉफ्ट पर अमेरिकी कर्मचारियों की जगह विदेशी लोगों को नौकरी देने का आरोप लगाया था।
उन्होंने कहा कि कंपनी ने 2025 में करीब 6,000 कर्मचारियों को नौकरी से निकाला। माइक्रोसॉफ्ट ने जवाब में कहा कि उसके H-1B कर्मचारियों को दिए जाने वाले वेतन का स्तर भी ऊंचा रहा है।
अमेरिकी प्रशासन विदेशी कर्मचारियों की भर्ती पर सख्ती बढ़ा रहा है और कंपनियों से अमेरिकी लोगों को अधिक अवसर देने की मांग कर रहा है।
असर
भारतीय IT कर्मचारियों पर क्या होगा असर?
इस फैसले से उन भारतीय पेशेवरों की ग्रीन कार्ड प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है, जिनके आवेदन में कंपनियां मदद कर रही हैं।
PERM प्रक्रिया में नियोक्ता को यह साबित करना होता है कि विदेशी कर्मचारी को नौकरी देने से अमेरिकी कर्मचारियों के अवसरों पर बुरा असर नहीं पड़ेगा।
हालांकि, PERM कार्यक्रम से निलंबन का मतलब यह नहीं है कि कर्मचारियों का H-1B वीजा अपने आप रद्द हो जाएगा। इससे ग्रीन कार्ड पाने में देरी हो सकती है।
असर
भारतीय IT कंपनियों के शेयरों पर भी असर
इस घटनाक्रम का असर शेयर बाजार में भी देखने को मिला।
गुरुवार को अमेरिकी कारोबार के दौरान माइक्रोसॉफ्ट के शेयर 1.3 प्रतिशत से ज्यादा गिर गए। इंफोसिस के अमेरिकी शेयर भी शुरुआती गिरावट के बाद 1 प्रतिशत से ज्यादा बढ़े, जबकि विप्रो के शेयर 1 प्रतिशत से कम नीचे रहे।
इस फैसले से उन भारतीय पेशेवरों की चिंता बढ़ सकती है, जिनकी ग्रीन कार्ड प्रक्रिया उनके नियोक्ता के जरिए चल रही है।