सरकार ने बढ़ाया पेट्रोल पर निर्यात शुल्क, डीजल पर शुल्क आधा किया
क्या है खबर?
केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल के निर्यात पर लगने वाले टैक्स में बदलाव किया है। पेट्रोल पर निर्यात शुल्क 5 गुना बढ़ाकर 50 पैसे से 2.50 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। वहीं, डीजल पर यह शुल्क 16 रुपये से घटाकर 8.50 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। वित्त मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, नई दरें आज (16 अक्टूबर) से लागू हो गई हैं।
हवाई ईंधन
हवाई ईंधन पर शुल्क में कोई बदलाव नहीं
विमान में इस्तेमाल होने वाले ईंधन यानी एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर केंद्र सरकार ने पहले के समान निर्यात शुल्क 10.50 रुपये प्रति लीटर ही रखा है।
नए बदलाव में विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क शामिल है। वहीं, पेट्रोल, डीजल और ATF के निर्यात पर सड़क और बुनियादी ढांचा उपकर नहीं लगेगा।
इससे पहले सरकार ने 1 अक्टूबर को इन ईंधनों पर लगने वाले निर्यात शुल्क की दरों में बदलाव किया था।
समीक्षा
हर 2 हफ्ते में होती है दरों की समीक्षा
सरकार पेट्रोल, डीजल और विमान ईंधन पर लगने वाले निर्यात शुल्क की हर 2 सप्ताह में समीक्षा करती है।
इस दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और संबंधित ईंधनों की औसत कीमतों को ध्यान में रखकर नई दरें तय की जाती हैं। इस बार पेट्रोल पर शुल्क बढ़ाया गया है, जबकि डीजल पर इसे कम किया गया है।
हालांकि, इन बदलावों का घरेलू बाजार में बिकने वाले पेट्रोल और डीजल की मौजूदा उत्पाद शुल्क दरों पर असर नहीं पड़ेगा।
वजह
घरेलू सप्लाई बनाए रखने के लिए लगाया गया था टैक्स
भारत ने जुलाई, 2022 में पहली बार ईंधन के निर्यात पर अतिरिक्त टैक्स लगाया था, जिसे 2 साल बाद हटा लिया गया।
मार्च, 2026 में पश्चिम एशिया के संघर्ष और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच सरकार ने इसे फिर लागू किया। इसका उद्देश्य विदेशों में ईंधन भेजने पर नियंत्रण रखना और देश में पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखना था।
डीजल और ATF पर शुल्क 27 मार्च से, जबकि पेट्रोल पर 16 मई से लागू हुआ था।