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नाना पाटेकर ने निशानेबाजी में जीते हैं कई राष्ट्रीय पदक, क्रिकेट के थे बड़े प्रशंसक
नाना पाटेकर बेहतरीन निशानेबाज थे (फाइल तस्वीर)

नाना पाटेकर ने निशानेबाजी में जीते हैं कई राष्ट्रीय पदक, क्रिकेट के थे बड़े प्रशंसक

Oct 08, 2026
01:53 pm

क्या है खबर?

भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का गुरुवार को गोवा स्थित उनके आवास पर दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। उनको खेलों के प्रति गहरे लगाव के लिए भी याद किया जाता रहेगा। वह क्रिकेट के बड़े प्रशंसक थे। नाना ने एक बार बताया था कि वह ऑफ स्पिन गेंदबाजी करते थे और मुंबई के मशहूर शिवाजी पार्क में बल्लेबाजों को नेट्स में गेंदबाजी किया करते थे। उन्होंने निशानेबाजी के कई राष्ट्रीय चैंपियनशिप में हिस्सा लिया था।

अभिनेता

नाना ने निशानेबाजी में कई पदक जीते 

नाना के लिए फिल्म की तैयारी के तौर पर शुरू हुई निशानेबाजी धीरे-धीरे जीवनभर का जुनून बन गई।

साल 2004 में इंदौर के BSF रेवती रेंज में आयोजित 48वीं राष्ट्रीय निशानेबाजी चैंपियनशिप में उन्होंने 300 मीटर बिग-बोर स्पर्धा में रजत पदक जीता था।

इसके 3 साल बाद उन्होंने महाराष्ट्र की टीम के लिए कांस्य पदक हासिल किया। उन्होंने 600 में से 549 अंक बनाए और व्यक्तिगत वर्ग में 12वें स्थान पर रहे थे।

खेल

लंबे समय तक निशानेबाजी से जुड़े रहे नाना 

निशानेबाजी में नाना की उपलब्धियों के चलते उन्हें 'रेनाउंड शॉट' का दर्जा मिला। इसके बाद उन्हें बिना शुल्क राइफल आयात करने की अनुमति भी मिली।

उम्र बढ़ने के बावजूद उनका निशानेबाजी के प्रति जुनून कम नहीं हुआ।

उन्होंने 60 साल की उम्र पार करने के बाद भी इस खेल को जारी रखा और राष्ट्रीय व राज्य स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेते रहे।

नाना लंबे समय तक प्रतिस्पर्धी निशानेबाजी से जुड़े रहे और इस खेल के प्रति लगन बनाए रखी।

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किरदार 

प्रहार फिल्म से शुरू की निशानेबाजी की तैयारी 

नाना ने बताया था कि निशानेबाजी में उनका सफर 40 की उम्र में शुरू हुआ। वह निशानेबाजी प्रतियोगिताओं के पुरस्कार वितरण समारोहों में मुख्य अतिथि बनकर जाते थे।

इस दौरान उन्होंने कई तरह की बंदूकों पर हाथ आजमाया।

उन्होंने बताया था कि वह बोतल के छोटे ढक्कन जैसे बेहद छोटे निशानों पर भी निशाना साधने लगे थे।

1991 की फिल्म 'प्रहार' की तैयारी के दौरान उन्होंने इसकी तैयारी शुरू की थी। उन्होंने भारतीय सेना से प्रशिक्षण लिया था।

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मदद

नाना निशानेबाजों की करते थे मदद 

नाना उभरते हुए राइफल निशानेबाजों की भी मदद करते थे। वह उनके प्रशिक्षण, कारतूस और जरूरी उपकरणों पर आने वाले बड़े खर्च को पूरा करने में सहयोग करते थे।

नाना राष्ट्रीय स्तर के निशानेबाजों के लिए बेहतर आर्थिक पुरस्कारों की भी वकालत करते थे।

उनका मानना था कि ऐसे प्रोत्साहन खिलाड़ियों को अपने जुनून को जारी रखने में मदद करेंगे और निशानेबाजी में उनके करियर को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी सहारा देंगे।

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