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IMC 2026 में जियो ने बताई 1,600 सैटेलाइट की योजना, दूर-दराज इलाकों तक पहुंचेगा नेटवर्क
IMC 2026 में जियो ने बताई 1,600 सैटेलाइट की योजना

IMC 2026 में जियो ने बताई 1,600 सैटेलाइट की योजना, दूर-दराज इलाकों तक पहुंचेगा नेटवर्क

Oct 08, 2026
06:14 pm

क्या है खबर?

रिलायंस जियो ने आज (8 अक्टूबर) इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026 में अपने प्रस्तावित 1,600 सैटेलाइट वाले लो अर्थ ऑर्बिट नेटवर्क की जानकारी साझा की है। कंपनी का कहना है कि इस नेटवर्क के जरिए उन इलाकों तक कनेक्टिविटी पहुंचाने की कोशिश होगी, जहां मोबाइल टावर या फाइबर नेटवर्क पहुंचाना मुश्किल है। इसमें दूर-दराज के गांव, द्वीप और सीमावर्ती क्षेत्र शामिल हैं। जियो ने इस योजना को 'सॉवरेन सैटेलाइट कनेक्टिविटी' के विजन के तहत पेश किया है।

ग्राउंड स्टेशन

23 ग्राउंड स्टेशन भी बनाए जाएंगे

जियो के प्रस्तावित नेटवर्क में करीब 1,600 लो अर्थ ऑर्बिट सैटेलाइट के साथ 23 ग्राउंड स्टेशन शामिल होंगे।

ये स्टेशन सैटेलाइट नेटवर्क को जमीन पर मौजूद जियो के बुनियादी ढांचे से जोड़ने में मदद करेंगे। कंपनी का लक्ष्य जमीन और समुद्री इलाकों में व्यापक कवरेज देने का है।

जियो के मुताबिक, यह नेटवर्क 6 लाख से ज्यादा गांवों वाले क्षेत्रों तक पहुंच बनाने में मदद कर सकता है। यह मौजूदा टेरेस्ट्रियल नेटवर्क का विकल्प नहीं होगा।

कनेक्टिविटी

कई क्षेत्रों में मिल सकती है कनेक्टिविटी

कंपनी के मुताबिक, सैटेलाइट नेटवर्क का इस्तेमाल ग्रामीण इलाकों में सीधे डिवाइस से कॉलिंग के अलावा कई दूसरे कामों में भी हो सकता है।

इनमें कारोबारी कनेक्टिविटी, दूरस्थ स्थानों, विमानन, समुद्री सेवाओं, सरकारी काम, रक्षा और आपदा के समय संचार जैसी जरूरतें शामिल हैं। जियो का कहना है कि सैटेलाइट नेटवर्क उसके मौजूदा जमीन आधारित नेटवर्क के साथ मिलकर काम करेगा।

इससे कमजोर नेटवर्क वाले इलाकों में लोगों को जुड़े रहने में मदद मिल सकती है।

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योजना

अभी प्रस्तावित योजना पर काम जारी

जियो का 1,600 सैटेलाइट और 23 ग्राउंड स्टेशन वाला नेटवर्क अभी प्रस्तावित योजना है।

कंपनी ने इंडिया मोबाइल कांग्रेस में इसकी कोई निश्चित लॉन्च समयसीमा नहीं बताई। जुलाई, 2026 में IN-SPACe ने प्रस्तावित सैटेलाइट समूह की तकनीकी समीक्षा की थी। जियो ने अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ में आवेदन की अनुमति के लिए सरकार से संपर्क किया है।

कंपनी का कहना है कि सैटेलाइट, इंजीनियरिंग, परीक्षण और संचालन जैसी पूरी प्रक्रिया भारत में रखने का लक्ष्य है।

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