ISRO ने मीथेन इंजन का किया सफल परीक्षण, ताकतवर रॉकेट बनाने की तैयारी तेज
क्या है खबर?
भारत भविष्य में ज्यादा ताकतवर रॉकेट बनाने की तैयारी कर रहा है। इसी दिशा में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने मीथेन से चलने वाले नए इंजन के एक अहम हिस्से का सफल परीक्षण किया है। 9 अक्टूबर, 2026 को तमिलनाडु के महेंद्रगिरी स्थित ISRO केंद्र में 1,100 किलो न्यूटन क्षमता वाले LME-1100 इंजन के गैस जनरेटर को पहली बार चालू किया गया। पूरा इंजन 2027 के मध्य तक तैयार करने का लक्ष्य है।
डिजाइन
ज्यादा ताकतवर इंजन का डिजाइन भी तैयार
ISRO ने 2,400 किलो न्यूटन क्षमता वाले एक और मीथेन इंजन का डिजाइन भी पूरा कर लिया है।
इसमें ऐसी तकनीक इस्तेमाल होगी, जो स्पेस-X के स्टारशिप रॉकेट के रैप्टर इंजन में भी मौजूद है। यह इंजन भविष्य में भारी सामान अंतरिक्ष तक पहुंचाने वाले रॉकेटों के लिए बनाया जा रहा है।
इससे भारत के चंद्रमा पर इंसानों को भेजने के प्रस्तावित मिशन में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
फायदा
मीथेन ईंधन से क्या होगा फायदा?
रॉकेट में इस्तेमाल होने वाला इंजन तय करता है कि वह कितना वजन अंतरिक्ष तक ले जा सकता है।
मीथेन ईंधन के तौर पर उपयोगी माना जा रहा है, क्योंकि यह अपेक्षाकृत साफ जलता है और इंजन की देखभाल का खर्च घटा सकता है। भविष्य में मंगल ग्रह पर मौजूद संसाधनों से भी मीथेन बनाया जा सकता है।
ISRO 2019 से इस तकनीक पर काम कर रहा है। शुरुआती परीक्षणों के बाद 2023 में LME-1100 परियोजना शुरू हुई।
अन्य
भारतीय कंपनियां भी इंजन बनाने में जुटीं
ISRO के मुताबिक, LME-1100 इंजन के 70 प्रतिशत से ज्यादा पुर्जे भारतीय उद्योगों की मदद से बनाए गए हैं।
इन्हें बनाने में 3 आयामी प्रिंटिंग तकनीक का भी इस्तेमाल हुआ है। इंजन के अलग-अलग हिस्सों की जांच जारी है। पूरा इंजन तैयार होने के बाद कई बार आग जलाकर परीक्षण किए जाएंगे।
इसके बाद ही इसे रॉकेट में इस्तेमाल करने की मंजूरी मिलेगी। इस तकनीक से भारत के नए भारी रॉकेट बनाने के प्रयासों को आगे बढ़ने में मदद मिलेगी।