गूगल के विलो चिप ने किया कमाल, क्वांटम कंप्यूटर की गलतियां 40 गुना हुईं कम
क्या है खबर?
गूगल ने क्वांटम कंप्यूटिंग के क्षेत्र में एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। कंपनी का दावा है कि उसने अपने विलो चिप में गलतियों को करीब 40 गुना कम करने का तरीका खोजा है। इससे भविष्य में क्वांटम कंप्यूटर ज्यादा भरोसेमंद तरीके से मुश्किल समस्याएं हल कर सकेंगे। गूगल के CEO सुंदर पिचई ने इसे उपयोगी क्वांटम कंप्यूटर बनाने की दिशा में अहम कदम बताया। इस शोध के नतीजे गूगल ने एक ब्लॉग पोस्ट में शेयर किया है।
गलतियां
क्वांटम कंप्यूटर में गलतियां कम करना क्यों जरूरी है?
क्वांटम कंप्यूटर सामान्य कंप्यूटर से अलग तरीके से काम करते हैं।
इनमें क्यूबिट नाम की छोटी इकाइयों का इस्तेमाल होता है, जो बहुत संवेदनशील होती हैं और आसानी से गलतियां कर सकती हैं। इससे मुश्किल गणनाओं के नतीजे प्रभावित हो सकते हैं।
वैज्ञानिक ऐसी तकनीक बनाने में जुटे हैं, जिससे ये कंप्यूटर सही नतीजे दे सकें। इसके लिए मैजिक स्टेट्स का इस्तेमाल किया जाता है, जो जटिल गणनाओं में मदद करते हैं, लेकिन इन्हें भरोसेमंद बनाना आसान नहीं है।
सटीकता
विलो चिप पर परीक्षण में मिली 99.99 प्रतिशत सटीकता
गूगल ने मैजिक स्टेट कल्टीवेशन नाम की तकनीक को अपने विलो चिप पर आजमाया।
यह तरीका गलतियों की जांच करता है और गलत नतीजे देने वाली कोशिशों को हटा देता है। कंपनी के मुताबिक, 105 क्यूबिट वाली चिप में से 54 का इस्तेमाल करके किए गए परीक्षण में गलतियां करीब 40 गुना कम हुईं। इससे तैयार क्वांटम स्टेट्स ने 99.99 प्रतिशत सटीकता हासिल की।
हालांकि, करीब 92 प्रतिशत कोशिशें खारिज करनी पड़ीं, इसलिए तकनीक में सुधार की जरूरत है।
मदद
नई दवाएं बनाने और जटिल समस्याएं सुलझाने में मिलेगी मदद
गूगल की इस खोज से भविष्य में ऐसे क्वांटम कंप्यूटर बनाने में मदद मिल सकती है, जो आज के सबसे ताकतवर सामान्य कंप्यूटरों के लिए मुश्किल काम कर सकें।
इनका इस्तेमाल अणुओं का अध्ययन करने, नई दवाएं विकसित करने और वैज्ञानिक शोध में किया जा सकता है। हालांकि, अभी यह साबित करना बाकी है कि यह तकनीक बड़े कंप्यूटरों पर भी प्रभावी रहेगी।
गूगल को इसके लिए और परीक्षण करने होंगे, ताकि समस्याएं भरोसेमंद ढंग से हल हो सकें।