भारत में भी सामने आए AI एजेंट्स के बेकाबू होने के मामले, CERT-In ने दी चेतावनी
क्या है खबर?
भारतीय साइबर सुरक्षा एजेंसी ने बताया कि शोध और परीक्षण के दौरान कंपनियों के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) एजेंट्स ने भारतीय संगठनों के निजी डाटा और गोपनीय कंटेंट तक पहुंच बनाई। भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया टीम (CERT-In) ने एक 'गंभीर' एडवाइजरी जारी की है। इसमें चेतावनी दी गई है कि हैकर साइबर हमले के लिए ओपन-सोर्स एजेंटिक AI टूल्स का हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे में संगठनों को अपनी साइबर सुरक्षा को मजबूत करने की जरूरत है।
सेंधमारी
ऐसे बनाई डाटा तक पहुंच
CERT-In के अनुसार, ऐप कॉन्फिगरेशन, सार्वजनिक कोड रिपॉजिटरी और अत्यधिक अनुमान करने योग्य क्लाउड भूमिकाओं में उजागर छोड़े गए क्रेडेंशियल और कनेक्शन सेटिंग्स के माध्यम से एजेंट घुसपैठ करने में कामयाब रहे।
इससे भारत उन देशों में शामिल हो गया है, जहां हाल में बेकाबू एजेंट्स की घटनाएं उजागर हुईं।
जुलाई में OpenAI के एजेंट ने हगिंग फेस को हैक कर लिया, वहीं ऑस्ट्रेलिया में मेडिकेयर सांख्यिकी पोर्टल सहित 4 सरकारी वेबसाइट्स तक पहुंच बना ली थी।
नुकसान
क्या हुआ इन घटनाओं से नुकसान?
CERT-In ने ऐसी किसी हैकिंग का जिक्र नहीं किया है। ऐसा लगता है कि एजेंट्स ने बस उस एक्सेस का इस्तेमाल किया, जो खुला पड़ा था। एजेंट्स ने लोगों का निजी डाटा और बिजनेस के गोपनीय रिकॉर्ड पढ़े।
पिछली घटनाओं में हर मामला किसी एक लैब से जुड़ा था, जबकि यहां अलग-अलग कंपनियों के एजेंट्स शामिल थे।
हालांकि, एजेंसी ने इन कंपनियों या प्रभावित संगठनों के नाम नहीं बताए और न ही किसी सिस्टम किसी बदलाव का हवाला दिया है।
उपाय
कंपनियों ने को सुरक्षा उपाय करने की सलाह
सरकारी सूत्रों ने PTI को बताया कि इस घटना में कोई बड़ा संगठन शामिल नहीं था, न ही इससे कोई बड़ा वित्तीय नुकसान हुआ और न ही कोई महत्वपूर्ण जानकारी लीक हुई।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस घटना ने मौजूदा कमजोरियों को उजागर कर दिया है। इसे एक शुरुआती चेतावनी के तौर पर देखा जाना चाहिए।
कंपनियों को अपनी सुरक्षा उपायों में सुधारने के साथ बेहतर सुरक्षा टूल्स में निवेश और रियल-टाइम मॉनिटरिंग को मजबूत करना चाहिए।