सौरभ दास और आशुतोष रांका को जेल भेजने के बाद अभिजीत दिपके को क्यों मिली रिहाई?
क्या है खबर?
दिल्ली में चल रहे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और छात्र संगठनों के प्रदर्शनों के बीच एक दिलचस्प कानूनी स्थिति सामने आई है। 'लहरा दो तिरंगा' आंदोलन के दौरान निवारक हिरासत में लिए गए CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके को शनिवार को रिहा कर दिया गया, जबकि उनके साथी नेता सौरभ दास और आशुतोष रांका को 5 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। आइए इस दोहरे मापदंडों के पीछे का कारण जानते हैं।
कार्रवाई
दिपके को मिली जमानत
दिपके को कोर्ट ने शनिवार को 50,000 के शांति मुचलके पर रिहा किया था।
उन्हें शुक्रवार को कनॉट प्लेस में मार्च शुरू होने से ठीक पहले हिरासत में ले लिया गया था। वे सीधे धरना स्थल पर नहीं पहुंचे थे।
इसी तरह दास और रांका को 5 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया है।
इन दोनों ने जंतर-मंतर को विरोध स्थलों की सूची से हटाए जाने के बाद चोरी-छिपे जंतर-मंतर में घुसने और अशांति फैलाने का प्रयास किया था।
कार्रवाई
तीनों नेताओं के खिलाफ किन धाराओं में की गई थी कार्रवाई?
पुलिस ने रांका और दास के साथ दिपके के मामलों में भारतीय नागरिक न्याय संहिता (BNSS) की धारा 126 और 170 के तहत कार्रवाई की है।
धारा 170 पुलिस को संज्ञेय अपराध रोकने के लिए एहतियातन गिरफ्तारी करने का अधिकार देती है और धारा 126 के तहत मजिस्ट्रेट शांति बनाए रखने के लिए बॉन्ड की मांग सकते हैं।
इसमें कोई आपराधिक मुकदमा दर्ज नहीं होता। ऐसे में सवाल उठाता है कि रांका और दास को जमानत क्यों नहीं मिली।
कारण
रांका और दास को क्यों भेजा गया जेल?
पुलिस के अनुसार, दास और रांका को 'शामिल अपराधी' माना गया क्योंकि उन्होंने 10 अक्टूबर को जमानत के लिए 50,000 का एक साल का शांति बॉन्ड भरा था।
इसके बाद भी उन्होंने 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर में जबरन घुसकर उस शांति बॉन्ड की शर्तों को तोड़ दिया।
इसी आधार पर विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) कोर्ट ने माना कि रिहा होने पर ये दोबारा कानून तोड़ सकते हैं और उन्हें 5 दिन के लिए जेल भेज दिया।
रिहाई
AISA अध्यक्ष नेहा बोरा को भी मिली रिहाई
इस आंदोलन के दौरान जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) की रिसर्च स्कॉलर और अखिल भारतीय छात्र संघ (AISA) अध्यक्ष नेहा बोरा को भी शुक्रवार रात मंडी हाउस से हिरासत में लिया गया था।
हालांकि, उन्हें दिपके की तरह मजिस्ट्रेट के सामने पेश नहीं किया गया, बल्कि दिल्ली पुलिस एक्ट की धारा 65 के तहत शनिवार सुबह 5 बजे सीधे थाने से ही रिहा कर दिया गया।
इस धारा के तहत प्रदर्शन का समय खत्म होने के बाद रिहा किया जाता है।
पृष्ठभूमि
क्या है पूरा विवाद?
CJP, छात्र संगठन और विपक्षी दल देश भर में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR में कथित धांधली को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं।
शुक्रवार को इस मार्च के चलते दिल्ली पुलिस ने कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क को छावनी में बदल दिया था और करीब 150 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया था।
जहां विपक्ष और छात्र इन गिरफ्तारियों को 'अवैध' बता रहे हैं, वहीं भाजपा ने इन प्रदर्शनों को विदेशी ताकतों द्वारा वित्तपोषित बताया है।