कलकत्ता हाई कोर्ट का अहम फैसला, कहा- शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करना अपराध नहीं
क्या है खबर?
कलकत्ता हाई कोर्ट ने कहा है कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों को सिर्फ इसलिए आपराधिक कृत्य नहीं माना जा सकता क्योंकि वे सत्ता में बैठे लोगों को पसंद नहीं हैं। असहमति व्यक्त करना और शांतिपूर्ण ढंग से एकत्र होने का अधिकार लोकतंत्र का मूलभूत पहलू है। यह टिप्पणी अगस्त 2021 में कथित भर्ती अनियमितताओं के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने वाले 6 स्कूल सेवा आयोग (SSC) नौकरी के उम्मीदवारों के खिलाफ की गई आपराधिक कार्यवाही रद्द करते हुए की गई है।
खारिज
हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के खिलाफ आरोपों को किया खारिज
हाई कोर्ट के जस्टिस अनुज सिंह ने गैरकानूनी सभा, गलत तरीके से प्रतिबंधित करने और संक्रमण फैलाने की संभावना वाले कृत्यों के आरोपों को खारिज कर दिया।
कोर्ट ने कहा कि पुलिस की शिकायत में इन अपराधों के आवश्यक तत्वों को स्थापित नहीं किया गया था।
कोर्ट ने आगे कहा, "यह एक अपरिहार्य निष्कर्ष है कि याचिकाकर्ताओं को विरोध प्रदर्शन के लिए दंडित किया जा रहा है। यह पूरी तरह से परेशान करने वाली और तुच्छ कार्रवाई है।
हवाला
कोर्ट ने पुराने आदेशों का दिया हवाला
कोर्ट ने हाई कोर्ट के एक पूर्व के फैसले, लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए संघ बनाम पश्चिम बंगाल सरकार का भी हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि प्रदर्शनकारियों का एक बड़ा जमावड़ा स्वाभाविक रूप से अवैध या असंवैधानिक नहीं है।
कोर्ट ने दोहराया कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19(1)(ख) सभी नागरिकों को शांतिपूर्ण ढंग से इकट्ठा होने और अपने अधिकारों की रक्षा के लिए सरकार के फैसलों पर असहमति जताने का अधिकार देता है।
प्रकरण
क्या था विरोध प्रदर्शन का पूरा मामला?
यह मामला 5 अगस्त, 2021 को हुए एक विरोध प्रदर्शन से संबंधित है, जब SSC नौकरी के इच्छुक उम्मीदवार सॉल्ट लेक स्थित मयूख भवन के पास एकत्र हुए थे।
वे कथित भर्ती अनियमितताओं के खिलाफ नारे लगाने के लिए विकास भवन की ओर बढ़ रहे थे।
पुलिस शिकायत में कोविड-19 प्रोटोकॉल और CRPC की धारा 144 के उल्लंघन का आरोप लगाया गया था। इस विरोध प्रदर्शन के सिलसिले में 13 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें 6 याचिकाकर्ता शामिल हैं।
फैसला
दिल्ली में CJP के प्रदर्शन के खिलाफ सुरक्षा बढ़ाए जाने के बीच आया फैसला
कोर्ट ने पाया कि FIR में 6 याचिकाकर्ताओं के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला साबित नहीं होता है।
कोर्ट ने बिधाननगर उत्तर पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR और उससे संबंधित सभी कार्यवाही रद्द कर दीं।
मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनर्निरीक्षण (SIR) के खिलाफ नियोजित प्रदर्शन से पहले दिल्ली में सुरक्षा बढ़ाए जाने के बीच यह फैसला आया है।
विपक्षी दलों ने इन प्रतिबंधों की आलोचना करते हुए इन्हें विरोध प्रदर्शन करने के उनके अधिकार का उल्लंघन बताया है।