दिल्ली हाई कोर्ट का पुलिस और RAF को बॉडी कैमरे पहनने का निर्देश देने से इनकार
क्या है खबर?
दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को दिल्ली पुलिस और त्वरित कार्रवाई बल (RAF) को भीड़ नियंत्रण और विरोध-प्रदर्शन के दौरान अनिवार्य रूप से बॉडी-वियर कैमरे पहनने का निर्देश देने से इनकार कर दिया। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नितिन वासुदेव सांब्रे और न्यायमूर्ति अरुण भारद्वाज की पीठ ने सरकार को निर्देश दिया कि वह बॉडी कैमरों के उपयोग की मांग वाली जनहित याचिका को एक अभ्यावेदन के रूप में माने। कोर्ट ने मामले में 6 महीने में निर्णय लेने को कहा है।
सुनवाई
केंद्र सरकार तैयार करेगी SoP
कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि केंद्र सरकार इस मुद्दे पर मानक संचालन प्रक्रिया (SoP) तैयार करने के संबंध में 6 महीने के भीतर निर्णय ले, अगर याचिकाकर्ता सरकार की निष्क्रियता से असंतुष्ट हैं, तो वे फिर कोर्ट आ सकते हैं।
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अखिल सिब्बल ने कोर्ट से सरकार को कार्रवाई करने के लिए कम समय सीमा निर्धारित करने का अनुरोध किया, जिसे न्यायालय ने अस्वीकार कर दिया।
मामला
याचिका में बॉडी कैमरे अनिवार्य करने की मांग थी
हाई कोर्ट ने यह आदेश जुलाई 2026 में जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के नेतृत्व में हुए प्रदर्शनों के बाद दायर जनहित याचिका का निपटारा करते हुए दिया है।
याचिका में SoP तैयार करने की मांग की गई थी, जिसके तहत कहा गया था कि भीड़ नियंत्रण, विरोध प्रबंधन या तितर-बितर करने के कर्तव्यों के लिए तैनात प्रत्येक दिल्ली पुलिस और RAF कर्मी के लिए बॉडी-वियर कैमरे का उपयोग अनिवार्य और निरंतर होना चाहिए।
प्रदर्शन
जंतर-मंतर में छात्रों पर हुआ था लाठीचार्ज
NEET पेपर लीक के मुद्दे पर जंतर-मंतर में हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज, आंसू गैस के गोले और पैलेट गन चलाई थी, जिनमें कई छात्र घायल हुए थे।
प्रदर्शन में मौजूद याचिकाकर्ता चाहत राघव ने कहा कि लाठीचार्ज, पेलेट से लगी चोटों और एक अधिकारी द्वारा एक महिला प्रदर्शनकारी को थप्पड़ मारने जैसी घटना राहगीरों के मोबाइल फुटेज पर आधारित हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसी घटना दस्तावेजित करने वाला पूरा रिकॉर्ड, आधिकारिक राज्य रिकॉर्डिंग पर निर्भर नहीं था।