दिल्ली कोर्ट ने सौरव दास और आशुतोष रांका पर शांति भंग करने की संभावना जताई
क्या है खबर?
दिल्ली की विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) कोर्ट ने सोमवार को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सह-संस्थापक सौरव दास और आशुतोष रांका की हिरासत को बढ़ाते हुए बड़ी टिप्पणी की थी। बार एंड बेंच के मुताबिक, कोर्ट ने कहा कि दोनों के व्यवहार से पता चलता है कि वे कानून का कोई सम्मान नहीं करते हैं और उनके शांति भंग करने को लेकर गंभीर चिंताएं हैं। बता दें कि कोर्ट ने दोनों की हिरासत 2 दिन बढ़ाई है।
टिप्पणी
दोनो पर भरोसा नहीं जगता- कोर्ट
कोर्ट ने कहा कि डी-नोटिफाइड इलाकों में विरोध-प्रदर्शन का आह्वान करके उन्होंने 'आदत' दिखाई है।
कोर्ट ने कहा, "जांच अधिकारी की अर्जी के साथ रिकॉर्ड में मौजूद काफी सामग्री हैं, जिससे शांति भंग होने और खलल पड़ने की संभावना के बारे में गंभीर चिंताएं जताई गई हैं, जिन्हें बिना ठीक से सोचे-समझे खारिज नहीं किया जा सकता।"
SEM रितु राज ने कहा कि दोनों के पिछले कामों को देखते हुए भरोसा नहीं जगाता कि वे ऐसा काम दोबारा नहीं करेंगे।
जमानत
जमानतदारों को भी अनफिट पाया
कोर्ट ने रांका और दास के लिए पेश किए गए जमानतदारों को भी अनफिट पाकर खारिज कर दिया, जिसमें एक बॉन्ड पर लगी तस्वीर और उसके आधार कार्ड पर लगी तस्वीर में अंतर पाया गया।
कोर्ट ने कहा कि जमानतदार कोई दूसरा वैध पहचान दस्तावेज नहीं दिखा पाया और उसने ठीक से जवाब नहीं दिया और दूसरा जमानतदार दास की बेसिक जानकारी नहीं दे सका।
कोर्ट ने कहा कि दोनों जमानतदारों का याचिकाकर्ताओं पर कोई नियंत्रण नहीं है।
हिरासत
13 अक्टूबर को गिरफ्तार किए गए थे दास और रांका
दास और रांका अपने 11 साथियों के साथ 13 अक्टूबर की सुबह एक निजी परिसर के रास्ते जंतर-मंतर पहुंचे और तिरंगा लहराया था।
केंद्र सरकार द्वारा जंतर-मंतर को निर्धारित विरोध स्थलों की सूची से हटाने के बाद यहां किसी प्रकार के प्रदर्शन पर रोक लगी हुई थी, जिसके कारण सभी को हिरासत में ले लिया गया।
कोर्ट ने दास और रांका को न्यायिक हिरासत में भेज दिया, जबकि अन्य साथियों को शर्तों के साथ जमानत दे दी।