CJP का विरोध प्रदर्शन: गिरफ्तारी से कैसे अलग है हिरासत और क्या मिलते हैं कानूनी अधिकार?
क्या है खबर?
देश में जब भी कोई बड़ा विरोध प्रदर्शन या आंदोलन होता है, तो पुलिस प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने या गिरफ्तार करने के कदम उठाती है। राजधानी दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन के दौरान भी पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 के तहत बड़े पैमाने पर नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया है। ऐसे में आइए जानते हैं कि गिरफ्तारी और हिरासत में क्या अंतर है और इसमें क्या कानूनी अधिकार मिलते हैं।
हिरासत
क्या होती है पुलिस हिरासत?
द इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, हिरासत पूरी तरह से एक निवारक कदम है। इसका उद्देश्य किसी संभावित अपराध को होने से रोकना या कानून-व्यवस्था बिगड़ने से बचाना है।
इसमें व्यक्ति पर कोई आधिकारिक FIR दर्ज नहीं हाती है। उसे कुछ घंटों के लिए पुलिस स्टेशन या अस्थायी जेल में रखा जाता है।
नागरिक को 24 घंटे में मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना भी अनिवार्य नहीं है। स्थिति समान्य होने पर पुलिस प्रदर्शनकारियों को बिना शर्त रिहा कर देती है।
गिरफ्तारी
हिरासत से कैसे अलग है गिरफ्तारी?
यह एक दंडात्मक कदम है। गिरफ्तारी तब की जाती है जब किसी व्यक्ति पर कोई विशिष्ट अपराध करने का पुख्ता आरोप हो या उसके खिलाफ FIR दर्ज हो।
गिरफ्तारी के बाद केस डायरी तैयार होती है और आरोपी का पूरा रिकॉर्ड दर्ज किया जाता है।
आरोपी को न्यायिक या पुलिस रिमांड पर भेजा जा सकता है। गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को हर हाल में 24 घंटे के भीतर नजदीकी मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना कानूनी रूप से अनिवार्य होता है।
जानकारी
गिरफ्तार व्यक्ति को अपनी मर्जी से नहीं छोड़ सकती पुलिस
गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को पुलिस अपनी मर्जी से नहीं छोड़ सकती है। उसकी रिहाई केवल सक्षम अदालत से जमानत मिलने या केस से बरी होने के बाद ही संभव होती है। ऐसे में गिरफ्तारी एक तरह से दंडात्मक कार्रवाई होती है।
शक्ति
BNSS के तहत पुलिस को क्या शक्तियां मिली हैं?
BNSS 2023 के तहत, पुलिस को पुख्ता अंदेशा हो कि कोई व्यक्ति गंभीर अपराध करने जा रहा है, तो वह उसे बिना वारंट हिरासत या गिरफ्तार कर सकती है।
यदि किसी क्षेत्र में धारा 163 लागू है और कोई उसका उल्लंघन करता है, तो पुलिस को उन्हें तुरंत मौके से हटाने और हिरासत में लेने का पूरा अधिकार है।
प्रदर्शनकारियों के हिंसक होने पर पुलिस को आवश्यक और आनुपातिक बल प्रयोग करने के लिए भी स्वतंत्र है।
अधिकार
पुलिस हिरासत के दौरान व्यक्ति के पास क्या होते हैं अधिकार?
पुलिस आपको बिना कारण बताए जबरन गाड़ी में नहीं बैठा सकती। आपको यह जानने का पूरा अधिकार है कि आपको किस कानून (जैसे धारा 163 का उल्लंघन) के तहत रोका जा रहा है।
यदि पुलिस आपको किसी बस, पुलिस स्टेशन या अस्थायी जेल में रख रही है, तो वहां मानवीय गरिमा और बुनियादी सुविधाएं मिलना आपका अधिकार है।
विरोध प्रदर्शन के समाप्त होने या स्थिति के सामान्य होने के बाद पुलिस को आपको रिहा करना ही होता है।
जानकारी
अनावश्यक बल प्रयोग के खिलाफ अधिकार
पुलिस हिरासत में लिए गए व्यक्ति को स्थिति सामान्य होने पर अनावश्यक रूप से रोककर नहीं रख सकती है। यदि आप शांतिपूर्ण हैं और सहयोग कर रहे हैं, तो पुलिस आपके खिलाफ किसी भी तरह बल प्रयोग नहीं कर सकती है।
अधिकार
पुलिस गिरफ्तारी के दौरान मिलने वाले अधिकार
यदि पुलिस आपको किसी विशिष्ट अपराध या FIR के तहत आधिकारिक तौर पर गिरफ्तार करती है, तो कानून आपको बेहद मजबूत संवैधानिक और वैधानिक अधिकार देता है।
इसके तहत पुलिस को आपको 24 घंटे में सक्षम मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश करना होगा, आपको अपनी पसंद के वकील से परामर्श करने की छूट देनी होगी, आपकी गिरफ्तारी की सूचना परिजनों को आवश्यक रूप से देनी होगी और गिरफ्तारी मेमो पर हस्ताक्षर कराकर एक कॉपी आपको देनी होगी।
जानकारी
चिकित्सीय जांच का का अधिकार
गिरफ्तारी के तुरंत बाद और हर 48 घंटे में आपका मेडिकल चेकअप कराना पुलिस की प्रमुख रूप से जिम्मेदारी है, ताकि गिरफ्तारी में किसी भी तरह की शारीरिक प्रताड़ना या मारपीट को रिकॉर्ड पर लाया जा सके। यह बहुत अहम अधिकार है।
महिला
महिला प्रदर्शनकारियों को मिलते हैं ये विशेष अधिकार
महिलाओं की सुरक्षा के लिए कानून में बेहद कड़े और अलग नियम तय किए गए हैं।
पुलिस किसी भी महिला को सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले न तो हिरासत में ले सकती है और न ही गिरफ्तार कर सकती है।
किसी भी महिला नागरिक को केवल एक महिला पुलिस अधिकारी ही छू सकती है या हिरासत में ले सकती है।
महिला को पुलिस स्टेशन में पुरुषों से पूरी तरह अलग हवालात में रखने का कानूनी अधिकार है।
हिरासत
दिल्ली में पुलिस ने दिपके समेत 1,000 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया
दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ CJP के विरोध प्रदर्शन को रोकने के लिए पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। 3
पुलिस ने मामले में CJP संस्थापक अभिजीत दिपके, सह-संस्थापक सौरभ दास, वरिष्ठ नेता आशुतोष रांका, मशहूर यूट्यूबर ध्रुव राठी, पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, दिपंकर भट्टाचार्य, प्रमुख राजनीतिक विश्लेषक योगेंद्र यादव और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा समेत 1,000 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया है।