भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ना चाहता था हत्या का दोषी, हाई कोर्ट ने जमानत दी
क्या है खबर?
उत्तर प्रदेश की इलाहाबाद हाई कोर्ट ने चुनाव लड़ने के इच्छुक एक हत्या के दोषी की उम्रकैद की सजा पर रोक लगा दी और जमानत दे दी। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की पीठ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने विभिन्न जन-प्रतिनिधियों की दोषसिद्धि पर रोक लगाते हुए यह माना है कि राजनेताओं का अपने मतदाताओं के प्रति विशेष कर्तव्य होता है। कोर्ट ने कहा कि दोषसिद्धि पर रोक चुनाव लड़ने के अवसर से वंचित कर सकती है।
सुनवाई
याचिकाकर्ता ने क्या कहा?
बार एंड बेंच के मुताबिक, अदालत ने दोषी ठहराए गए नंदन लाल राय की लंबित अपील में दायर जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया।
राय की रिहाई की मांग करते हुए, उनके वकील ने तर्क दिया कि पीड़ित एक राजनीतिक रूप से सक्रिय व्यक्ति था और आरोपी को केवल संदेह और अनुमान के आधार पर फंसाया गया था।
कोर्ट में कहा कि अभियोजन पक्ष का मामला काफी हद तक परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित है।
याचिका
कोर्ट ने क्या आदेश दिया?
याचिकाकर्ता ने कहा था कि वह उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों में निर्दलीय या संभवतः भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ना चाहता है।
बहस सुनने के बाद कोर्ट ने फैसला सुनाया, "हमारा मानना है कि अपीलकर्ता को दी गई सजा और दोषसिद्धि को इस अपील के लंबित रहने के दौरान स्थगित रखा जाना चाहिए।"
कोर्ट ने कहा कि आम आदमी के आजीविका का अधिकार, किसी राजनेता के चुनाव लड़ने के अधिकार से कम महत्वपूर्ण नहीं है।
कोर्ट
किस मामले में दोषी है याचिकाकर्ता
राम जन्मभूमि आंदोलन के सक्रिय सदस्य प्रमोद कुमार निगम की हत्या के मामले में कुछ लोगों को दोषी ठहराया गया है, जिसमें राय भी शामिल हैं।
उनको अप्रैल 2025 में वाराणसी की एक अदालत ने हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि राय का संबंध गैंगस्टर से नेता बने मुख्तार अंसारी से था। हालांकि, राय के वकील ने बताया कि वह अपनी सजा से पहले भाजपा के सक्रिय कार्यकर्ता थे।