कर्नाटक में AI और सैटेलाइट से होगी खेती की निगरानी, पैदावार का भी चलेगा पता
क्या है खबर?
कर्नाटक सरकार खेती की निगरानी और फसल के नुकसान का सही आकलन करने के लिए अब नई तकनीक का इस्तेमाल करने जा रही है। इसके तहत सैटेलाइट की मदद से फसलों की स्थिति और पैदावार का अनुमान लगाया जाएगा। खासतौर पर सूखे से प्रभावित इलाकों पर ध्यान दिया जाएगा। कर्नाटक स्टेट रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर (KSRSAC) ने इस व्यवस्था को तैयार करने के लिए कंपनियों और स्टार्टअप से आवेदन मांगे हैं।
प्रोजेक्ट
5 तालुकों में शुरू होगा पायलट प्रोजेक्ट
यह योजना मुख्यमंत्री रायथा चैतन्य कर्नाटक एग्रीटेक मिशन 2026 के तहत शुरू की जाएगी।
शुरुआती चरण में 2 फसल सीजन के दौरान करीब 500 वर्ग किलोमीटर के 2 क्षेत्रों में इसका परीक्षण होगा। इनमें बेलगावी जिले का अथानी, विजयपुरा का टिकोटा, रायचूर जिले के देवदुर्गा और सिंधनूर तथा कोप्पल जिले का कुस्तगी शामिल हैं।
इस परियोजना का उद्देश्य फसलों की स्थिति पर नजर रखना और नुकसान का समय रहते पता लगाना है।
पैदावार
AI से बीमारी और पैदावार का लगेगा अनुमान
इस व्यवस्था में सैटेलाइट तस्वीरों, ड्रोन, मौसम की जानकारी और खेतों से जुटाए गए आंकड़ों का इस्तेमाल होगा।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से फसलों की पहचान की जाएगी और कीटों या बीमारियों के संभावित खतरे का पता लगाया जाएगा। हर 2 सप्ताह में फसलों की स्थिति का आकलन करने की योजना है। इससे खराब होती फसलों वाले इलाकों की पहचान होगी।
साथ ही, गांव के स्तर पर अलग-अलग फसलों की पैदावार का अनुमान लगाने में भी मदद मिलेगी।
अन्य
सूखे से होने वाले नुकसान का आकलन करना होगा आसान
कर्नाटक के 240 तालुकों में से 226 को सरकार सूखा प्रभावित घोषित कर चुकी है।
राज्य में फसलों को 46,324 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान होने का अनुमान है। नई व्यवस्था से अधिकारियों को नुकसान का बेहतर आकलन करने और खेती की योजना बनाने में मदद मिल सकती है।
परीक्षण के दौरान मिले आंकड़ों और उनकी सटीकता के आधार पर इसे पूरे राज्य में लागू करने पर फैसला लिया जाएगा। इसके लिए पहले परियोजना के नतीजों की जांच होगी।