नाना पाटेकर की उपलब्धियां: 3 राष्ट्रीय पुरस्कार, फिल्मफेयर का ऐतिहासिक रिकॉर्ड और सच्चा नायक
क्या है खबर?
भारतीय सिनेमा के दमदार, बेबाक और यथार्थवादी अभिनेताओं में से एक, नाना पाटेकर के निधन से हर कोई स्तब्ध है। उन्होंने 75 साल की उम्र में उनका अचानक चले जाना मनोरंजन जगत और उनके करोड़ों फैंस के लिए एक अपूरणीय क्षति है। लोग सोशल मीडिया पर उन्हें नम आंखों से विदाई दे रहे हैं। नाना अपने पीछे पुरस्कारों और अद्वितीय अभिनय की एक ऐसी गौरवशाली विरासत को छोड़ गए हैं, जो सिनेमा के इतिहास में हमेशा के लिए अमर रहेगी।
उपलब्धियां
जब नाना ने राष्ट्रीय पुरस्कारों की लगाई हैट्रिक
नाना की अद्भुत प्रतिभा को 3 बार देश का प्रतिष्ठित राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार देकर सराहा गया।
साल 1990 में आई फिल्म 'परिंदा' में उन्होंने अंडरवर्ल्ड डॉन 'अन्ना' का खौफनाक और मानसिक रूप से अस्थिर किरदार निभाया था। इसके लिए उन्हें पहली बार सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला।
फिर 'क्रांतिवीर' (1995) में उनके उनके दमदार और क्रांतिकारी संवादों के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला।
1997 में 'अग्निसाक्षी' के लिए उन्हें फिर सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता चुना गया।
रिकॉर्ड
फिल्मफेयर का ऐतिहासिक रिकॉर्ड भी उनके नाम
नाना फिल्मफेयर के इतिहास में इकलौते ऐसे अभिनेता रहे, जिन्होंने अभिनय की तीनों प्रमुख श्रेणियों में शानदार जीत हासिल करके हैट्रिक बनाया।
उन्हें 'परिंदा' के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का फिल्मफेयर पुरस्कार मिला।
'क्रांतिवीर' के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का फिल्मफेयर दिया गया।
'अंगार' (1993) और 'अपहरण' (2006) के लिए सर्वश्रेष्ठ खलनायक का फिल्मफेयर पुरस्कार जीता।
इसके अलावा, नाना को साल 2016 में आई ब्लॉकबस्टर फिल्म 'नटसम्राट' में उनके अभिनय के लिए फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता (मराठी) का पुरस्कार दिया गया।
सच्चा नायक
भारत सरकार से मिला देश का बड़ा सम्मान
नाना को देश के सबसे बड़े सम्मान 'पद्मश्री' से नवाजा गया था। 2013 में, उन्हें यह सम्मान कला, रंगमंच और भारतीय सिनेमा में उनके अमूल्य योगदान के लिए दिया गया था।
फिल्मी उपलब्धियों के अलावा, नाना असल जिंदगी में भी एक सच्चे नायक थे। उन्होंने फिल्म 'प्रहार' (1991) के लिए भारतीय सेना की कड़ी ट्रेनिंग ली थी, जिसके लिए उन्हें 'मानद लेफ्टिनेंट कर्नल' की रैंक मिली थी।
महाराष्ट्र के सूखाग्रस्त किसानों की मदद के लिए उन्होंने 'नाम फाउंडेशन' भी चलाया।