नाना पाटेकर की अंतिम इच्छा- मुझे सूखी लकड़ी से जलाना, न रोना और ना फूल चढ़ाना
क्या है खबर?
बेबाक अंदाज में जिंदगी जीने वाले नाना पाटेकर जाते-जाते भी दुनिया को एक गहरा जीवन दर्शन दे गए। उन्होंने अपनी मौत को लेकर भी खरी बात कही थी। नाना की आखिरी इच्छा थी कि उनके जाने पर कोई न रोए, ना उनकी तस्वीर पर फूल-मालाएं चढ़ाई जाएं। वो कहते थे कि उन्हें सूखी लकड़ी से जलाना, ताकि जब वो जाएं तो किसी का दिल भारी न हो। उनका ये बेफिक्र और सच्चा अंदाज हर किसी को भावुक कर रहा है।
बेबाक बोल
मौत पर नाना पाटेकर के बेबाक बोल
75 की उम्र में नाना के दुनिया से विदा लेने के बाद नाना का एक पुराना इंटरव्यू वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने अपनी मौत और अंतिम संस्कार पर बेबाक बात कही थी।
नाना ने कहा था कि अंतिम विदाई के लिए बस 12 मन सूखी लकड़ी ही काफी है, ताकि कोई धुआं देखकर ये न समझे कि लोग रो रहे हैं। उन्होंने साफ कहा था कि जाने के बाद न कोई रोए और न ही तस्वीर पर हार चढ़ाए।
भावुक पल
मुझे मौत पर भरोसा है, इसलिए सामान नहीं जोड़ता- नाना
जिंदगी की नश्वरता और सामान के मोह पर बात करते हुए नाना ने कहा था, "मुझे पता है कि मुझे कल मरना ही है। मेरा मौत पर पूरा भरोसा है, इसलिए मुझे इन भौतिक चीजों में कोई दिलचस्पी नहीं। जो लोग सोचते हैं कि वे कभी मरने ही नहीं वाले, वही जीवनभर चीजें इकट्ठा करने में लगे रहते हैं।"
उनका मानना था कि जब जीवन अस्थायी है तो फिर गैर-जरूरी संपत्ति का अंबार लगाने का कोई मतलब नहीं रह जाता।
मिजाज
दशकों की शोहरत, फिर भी फकीराना मिजाज
फिल्म इंडस्ट्री में दशकों बिताने के बाद भी नाना कभी नहीं बदले।
जहां नाम, पैसा और ग्लैमर अक्सर इंसान को बदलकर रख देता है, वहीं नाना हमेशा जमीन से जुड़े रहे।
जब उनसे पूछा गया कि क्या इतने सालों की शोहरत ने उन्हें बदला है तो उनका जवाब उनके फकीराना मिजाज को साफ बयां करता था। सिनेमा की चकाचौंध भी उनके सादगी भरे जीवन और विचारों को डिगा नहीं पाई।
संपत्ति
"12 मन लकड़ी ही मेरी कुल संपत्ति है, इसी को साथ लेकर जाऊंगा"
फिल्म इंडस्ट्री की चकाचौंध में लोगों को बदलते देखने के बावजूद जब नाना से पूछा गया कि वो इतने सालों बाद भी वैसे के वैसे ही क्यों रहे तो उन्होंने अपने उसी जाने-पहचाने बेबाक अंदाज में कड़वा सच बयां किया।
नाना ने कहा था, "मुझे पता है कि मुझे एक दिन जाना ही है और अंतिम संस्कार के लिए बस 12 मन लकड़ी की जरूरत होगी। यही मेरी कुल संपत्ति है और मैं इसी के साथ विदा हो जाऊंगा।"
दिल की बात
नाना ने कहा था- गीली लकड़ी मत जलाना, वरना लगेगा लोग मेरे लिए रो रहे
नाना ने बताया था कि उन्होंने अपने अंतिम संस्कार के लिए पहले ही सूखी लकड़ियां संभालकर रखी हैं।
नाना बोले, "मैंने सूखी लकड़ियां रखी हैं और कह दिया है कि मुझे उसी में जलाना। गीली लकड़ियां मत जलाना, वरना धुआं होगा और दोस्तों व रिश्तेदारों की आंखों में चला जाएगा। उनकी आंखों से पानी गिरेगा और जाते-जाते मुझे गलतफहमी हो जाएगी कि वे मेरे लिए रो रहे हैं। कम से कम मरते वक्त तो मुझे ऐसी गलतफहमी नहीं होनी चाहिए।"
शोहरत का भ्रम
क्यों अपनी तस्वीर तक लगाने के खिलाफ थे नाना?
नाना बोले था, "मैं इसी तरह जीता हूं और मुझे लगता है कि यही सच है। एक बार आप मर गए तो कोई आपको याद नहीं रखेगा। 2 से 4 दिनों में सब भूल जाएंगे। मैंने तो उनसे यहां तक कह दिया है कि मेरी तस्वीर भी मत लगाना। मुझे पूरी तरह भूल जाना।"
नाना का मानना था कि इंसान कितना ही मशहूर क्यों न हो, मौत के बाद दूसरों की जिंदगी में उसकी मौजूदगी का अंत होना तय है।
अपनों का मिलन
"मेरे सारे अपने वहीं हैं, मौत तो बस मां से मिलने का जरिया है"
मौत की बेबाक बातों के बीच नाना ने कहा था, "मुझे आज भी लगता है कि मेरी मां जीवित हैं। मेरे लिए मौत का मतलब है कि यहां से जाने के बाद मैं उनसे मिलूंगा। हम 7 भाई-बहन थे, 6 जा चुके हैं और सिर्फ मैं बचा हूं। जब मां, पिता और सभी भाई-बहन वहां चले गए हैं तो मैं भी इस दुनिया का नहीं हूं। मेरे अपने सब वहीं हैं, इसलिए मैं हमेशा उन्हीं के बारे में सोचता हूं।"