रेपो रेट बढ़ने के बाद होम लोन वालों पर कब पड़ेगा असर? जानें EMI का हिसाब
क्या है खबर?
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रेपो रेट 25 अंक बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत कर दिया है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि होम लोन की EMI अगले महीने से ही बढ़ जाएगी। इसका असर इस बात पर निर्भर करेगा कि आपका लोन किस ब्याज दर से जुड़ा है और बैंक की ब्याज दर बदलने की तारीख कब है। रेपो रेट से जुड़े नए फ्लोटिंग रेट लोन पर असर जल्दी दिख सकता है, जबकि पुराने लोन में समय लग सकता है।
#1
रेपो रेट से जुड़े लोन पर असर
जिन लोगों का होम लोन रेपो रेट से जुड़ा है, उनकी ब्याज दर में बदलाव जल्दी हो सकता है।
बैंकों को ऐसे लोन की ब्याज दर कम से कम 3 महीने में एक बार बदलनी होती है। इसलिए 25 अंक की बढ़ोतरी का असर अगले 1-3 महीने में दिखाई दे सकता है।
बैंक चाहें तो EMI बढ़ा सकते हैं या लोन चुकाने की अवधि बढ़ा सकते हैं। इसलिए हर कर्जदार की EMI तुरंत बढ़े, यह जरूरी नहीं है।
#2
MCLR वाले पुराने लोन में देर
जिन लोगों ने पुराने समय में MCLR से जुड़ा होम लोन लिया था, उन्हें रेपो रेट बढ़ने का असर तुरंत नहीं दिख सकता।
इसकी वजह यह है कि ऐसे लोन की ब्याज दर बैंक की तय रीसेट तारीख पर बदलती है। यह अवधि 1 साल तक हो सकती है।
इसलिए अगर किसी ग्राहक की रीसेट तारीख कुछ महीने बाद है, तो उसे पुरानी दर भुगतान करना होगा। बाद में बैंक ब्याज बढ़ाने पर EMI या अवधि बढ़ा सकता है।
#3
घर खरीदने वालों पर क्या असर?
25 बेसिस पॉइंट की एक बढ़ोतरी से होम लोन लेने वाले हर व्यक्ति की EMI में बड़ा बदलाव होना जरूरी नहीं है।
बैंक कई बार EMI बढ़ाने के बजाय लोन की अवधि बढ़ा देते हैं, जिससे महीने का खर्च ज्यादा नहीं बढ़ता। अगर ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं या आगे और बढ़ती हैं, तो कर्ज की कुल लागत बढ़ सकती है।
इसका असर नए घर खरीदारों के साथ पुराने फ्लोटिंग रेट होम लोन पर पड़ सकता है।