UPI पर लगने वाला शुल्क फिलहाल टला, दिवाली के बाद लागू हो सकते हैं नए नियम
क्या है खबर?
नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) UPI पर लगने वाले शुल्क को फिलहाल टालने का फैसला लिया है। अब कुछ UPI भुगतानों पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) शुल्क दिवाली के तुरंत बाद नवंबर के दूसरे सप्ताह में लागू किया जा सकता है। हालांकि, इसकी तारीख अलग से घोषित की जाएगी। पहले इसे 16 अक्टूबर से लागू करने की योजना थी। त्योहारों के दौरान कारोबारियों पर अतिरिक्त बोझ पड़ने की आशंका के बीच यह फैसला लिया गया है।
शुल्क
2,000 रुपये से ज्यादा के भुगतान पर लग सकता है शुल्क
प्रस्ताव के मुताबिक, 2,000 रुपये से अधिक के कुछ UPI भुगतानों पर 0.4 प्रतिशत शुल्क लगाया जा सकता है।
यह रकम दुकानदार या कारोबारी से डिजिटल भुगतान की सुविधा देने के बदले ली जाती है। उदाहरण के लिए, 2,000 रुपये के भुगतान पर 8 रुपये और 10,000 रुपये के भुगतान पर 40 रुपये शुल्क बनता है।
हालांकि, यह नियम सभी UPI भुगतानों पर लागू नहीं होगा। किन भुगतानों पर कितना शुल्क लगेगा, इसकी जानकारी अलग से दी जाएगी।
चिंता
कारोबारी और भुगतान कंपनियों ने जताई चिंता
MDR शुल्क लागू करने की योजना का कारोबारी संगठनों, वित्तीय तकनीक कंपनियों और भुगतान सेवा देने वाली कंपनियों ने विरोध किया है।
उनका कहना है कि त्योहारों के समय नया शुल्क लागू होने से कारोबारियों का खर्च बढ़ सकता है। यह भी आशंका है कि दुकानदार इस खर्च का बोझ ग्राहकों पर डाल सकते हैं।
UPI का इस्तेमाल छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े कारोबार तक करते हैं। ऐसे में शुल्क का असर देशभर के लाखों कारोबारियों पर पड़ सकता है।
अंतर
कार्ड और UPI के शुल्क में है अंतर
भारत में करीब 10 करोड़ कारोबारी UPI से भुगतान स्वीकार करते हैं, जबकि कार्ड लगभग 1.1 करोड़ मशीनों पर इस्तेमाल किए जाते हैं।
कार्ड भुगतान में शुल्क की दरें काफी हद तक समान रहती हैं, लेकिन UPI में बिजली-पानी के बिल, कर्ज चुकाने और शेयर बाजार से जुड़े भुगतानों के लिए अलग-अलग दरें हो सकती हैं।
वित्त मंत्री ने कहा था कि शुल्क लागू करने का समय तय करना भुगतान क्षेत्र से जुड़े पक्षों पर निर्भर करेगा।