UPI पर 15 अक्टूबर से लगेगा 0.4 प्रतिशत शुल्क, RBI गवर्नर ने बताया कितना होगा असर
क्या है खबर?
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने अक्टूबर की मौद्रिक नीति समीक्षा के बाद आज UPI पर लगने वाले शुल्क को लेकर अपनी राय सामने रखी है। उन्होंने कहा कि कुछ खास UPI लेनदेन पर लगने वाली छोटी मर्चेंट फीस से लेनदेन की संख्या पर बड़ा असर पड़ने की उम्मीद नहीं है। मल्होत्रा के मुताबिक, अभी तक UPI लेनदेन की मात्रा में कोई गिरावट नहीं दिखी है। ऐसे में इस शुल्क को लेकर चिंता सीमित है।
शुल्क
15 अक्टूबर से लागू होगा शुल्क
15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से ज्यादा के कुछ पात्र UPI भुगतानों पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट शुल्क लागू होगा।
यह शुल्क सीधे ग्राहक से नहीं लिया जाएगा, बल्कि भुगतान से जुड़े कारोबारियों और कंपनियों के बीच तय व्यवस्था के तहत लिया जाएगा। वहीं, 2,000 रुपये तक के भुगतान और छोटे कारोबारियों से जुड़े पात्र लेनदेन शुल्क मुक्त रहेंगे।
सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य ग्राहक पर अतिरिक्त बोझ डाले बिना डिजिटल भुगतान व्यवस्था को जारी रखना है।
अन्य शुल्क
चर्चा में कंपनियों के मौजूदा शुल्क भी
नए मर्चेंट शुल्क के बाद भुगतान कंपनियों की कमाई और उनके मौजूदा शुल्क को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है।
कई फिनटेक कंपनियां मोबाइल रिचार्ज और बिल भुगतान जैसी सेवाओं पर सुविधा या प्लेटफॉर्म शुल्क लेती हैं। कंपनियों का कहना है कि प्लेटफॉर्म शुल्क केवल भुगतान के लिए नहीं, बल्कि तकनीकी व्यवस्था, चेकआउट और दूसरी सेवाओं को चलाने के लिए लिया जाता है।
इसलिए नए मर्चेंट शुल्क के बावजूद ये शुल्क जारी रह सकते हैं।
अन्य
ग्राहक पर बोझ नहीं डालने की कोशिश
भुगतान कंपनियों के मुताबिक, प्लेटफॉर्म शुल्क को नए मर्चेंट शुल्क की भरपाई का जरिया नहीं बनाया जाना चाहिए।
सरकार और NPCI चाहते हैं कि नए शुल्क का बोझ ग्राहकों पर न डाला जाए। पहले UPI पर 0.3 प्रतिशत मर्चेंट शुल्क लगता था, लेकिन डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए 2020 में इसे हटा दिया गया था।
अब नई व्यवस्था के जरिए डिजिटल भुगतान को मुफ्त रखते हुए पूरे भुगतान तंत्र को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाने की कोशिश है।