टाटा ट्रस्ट का खर्च 73 फीसदी बढ़कर 1,556 करोड़ रुपये हुआ, जानिए कहां-कहां लगाए
क्या है खबर?
टाटा ट्रस्ट का परोपकारी कार्यों पर खर्च वित्त वर्ष 2025-26 में 72.5 फीसदी बढ़कर 1,556 करोड़ रुपये हो गया। यह नोएल टाटा के चेयरमैन के रूप में पहला पूरा वित्तीय वर्ष था। इस दौरान संस्थागत फंडिंग का सबसे बड़ा हिस्सा ग्रामीण उत्थान, शिक्षा और कैंसर देखभाल के लिए खर्च किया गया। ट्रस्ट की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, यह कुल राशि 2024-25 में 902.32 करोड़ रुपये से बढ़कर अधिक हो गई।
आंकड़े
कहां-कहां खर्च किया पैसा?
संस्थागत अनुदान और प्रत्यक्ष परियोजना व्यय की राशि 1,353 करोड़ रुपये रही, जबकि व्यक्तियों को दी सहायता करीब 203 करोड़ रुपये थी।
संस्थागत परियोजनाओं में सबसे अधिक आवंटन ग्रामीण उत्थान के लिए 457 करोड़ रुपये का किया गया। शिक्षा के लिए 270 करोड़ और कैंसर देखभाल के लिए 178 करोड़ रुपये आवंटित किए गए।
स्वास्थ्य सेवा को 105.97 करोड़ रुपये मिले, जबकि जल और स्वच्छता के लिए 59.04 करोड़ रुपये और पोषण के लिए 57.64 करोड़ रुपये आवंटित किए गए।
योजना
40-50 अस्पताल बनाने की योजना
व्यक्तिगत अनुदानों में चिकित्सा सहायता का हिस्सा 143.30 करोड़ रुपये रहा, जबकि शिक्षा से जुड़ी सहायता 59.38 करोड़ रुपये रही।
अपने संदेश में, नोएल टाटा ने कहा कि ट्रस्ट ऐसे संस्थानों और मॉडल्स को बनाने पर अधिक ध्यान देंगे, जो लंबे समय तक चलने वाली सार्वजनिक संपत्ति बन सकें।
ट्रस्ट पूरे भारत में 40-50 गैर-लाभकारी सामान्य अस्पतालों का एक नेटवर्क बनाने की दिशा में भी काम कर रहे हैं। इससे आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को गुणवत्तापूर्ण इलाज मिल सके।