RBI ने 4 साल बाद रेपो रेट में 25 अंक की बढ़ोतरी की, 5.5 प्रतिशत हुआ
क्या है खबर?
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने बुधवार को रेपो दर में 25 आधार अंक की वृद्धि करते हुए इसे 5.50 प्रतिशत कर दिया है। समिति ने बढ़ती मुद्रास्फीति के दबाव और चुनौतीपूर्ण वैश्विक आर्थिक माहौल को देखते हुए फरवरी 2023 के बाद पहली बार रेपो रेट में वृद्धि की है। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि यह निर्णय मुद्रास्फीति के बदलते दृष्टिकोण से प्रेरित था, हालांकि भारतीय अर्थव्यवस्था लचीली बनी हुई है।
ट्विटर पोस्ट
गर्वनर ने जानकारी दी
Monetary Policy Statement by Shri Sanjay Malhotra, Governor, RBI - October 7, 2026 https://t.co/ppHzJigh1K
— ReserveBankOfIndia (@RBI) October 7, 2026
रेपो रेट
पिछली बैठकों में नहीं हुआ था बदलाव
RBI ने अंतिम बार रेपो रेट फरवरी 2023 में बढ़ाया था। इसके बाद कई तिमाही बैठकों में दर नहीं बढ़ा।
इस साल फरवरी, अप्रैल और अगस्त में हुई MPC की बैठक में भी रेपो रेट बढ़ाने और घटाने पर कोई फैसला नहीं हुआ और इसे अपरिवर्तित रखा गया था।
हालांकि, पिछले साल दिसंबर में समिति ने रेपो रेट में 0.25 अंक की कमी की थी और रेपो रेट घटकर 5.25 प्रतिशत हो गया था। तब से यही बरकरार था।
महंगाई दर
मुद्रास्फीति और इसका दृष्टिकोण अनुकूल नहीं
मल्होत्रा ने बताया, "मुद्रास्फीति और इसका दृष्टिकोण पिछले वर्ष की तुलना में उतना अनुकूल नहीं है।"
उन्होंने कहा कि अगले 3 तिमाहियों में शीर्ष उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) मुद्रास्फीति औसतन लगभग 5.8 प्रतिशत रहने की उम्मीद है, जबकि पूरे वित्तीय वर्ष 4.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
मल्होत्रा ने कहा कि उच्च मुद्रास्फीति की उम्मीदों और मूल्य दबावों के विस्तार के कुछ प्रमाण मिले हैं। हालांकि, आपूर्ति-पक्ष के दबाव कंपनियों के मूल्य निर्धारण व्यवहार में अंतर्निहित होने के संकेत हैं।
दर
क्यों बढ़ाई गई रेपो रेट?
RBI का यह निर्णय वैश्विक स्तर पर खाद्य और ऊर्जा की बढ़ती कीमतों, वित्तीय बाजार में अस्थिरता और वैश्विक वित्तीय परिस्थितियों में सख्ती के मद्देनजर आया है।
मल्होत्रा ने कहा कि इस साल इसमें मंदी की उम्मीद है, जबकि ऊर्जा और खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतें वैश्विक मुद्रास्फीति को बढ़ा रही हैं।
उन्होंने व्यापारिक अनिश्चितता, विकसित अर्थव्यवस्थाओं में बढ़ते बॉन्ड यील्ड और मजबूत होते अमेरिकी डॉलर को भी वैश्विक वित्तीय बाजारों में घबराहट के कारकों के रूप में बताया है।
कर्ज
क्या रेपो रेट बढ़ने से बढ़ जाएगी लोन की EMI?
रेपो रेट बढ़ने से बैंकों को RBI से मिलने वाला कर्ज महंगा हो जाएगा, तो ऐसे में बैंक भी अपने उपभोक्ताओं से लोन पर ज्यादा वसूली करेंगे, लेकिन यह तुरंत लागू नहीं होगा।
फ्लोटिंग-रेट होम लोन वाले उधारकर्ताओं को इसका असर देखने को मिल सकता है, अगर RBI के फैसले के बाद उनका ऋणदाता लागू ऋण दर बढ़ा देता है।
बैंक ब्याज दर में बढ़ोतरी को अलग-अलग तरीकों से लागू कर सकते हैं। ऋण की अवधि लंबी हो सकती है।
जानकारी
नया घर खरीदने वालों पर बोझ
रेपो रेट बढ़ने का असर ऋणदाता, ऋण के प्रकार, उधारकर्ता की ब्याज दर और शेष अवधि पर निर्भर करेगा। घर खरीदने की योजना बना रहे किसी व्यक्ति के लिए, उच्च ऋण लागत उनके द्वारा ऋण लेने की सहजता की राशि को प्रभावित कर सकती है।
रेपो रेट
रेपो रेट क्या है?
RBI जिस दर पर बैंकों को कर्ज देता है, उसे रेपो रेट कहा जाता है।
दरअसल, जिस प्रकार लोग अपनी जरूरतों के लिए बैंकों से पैसा लेकर ब्याज चुकाते हैं, उसी प्रकार बैंकों को केंद्रीय बैंक यानी RBI से लोन लेना पड़ता है।
इस लोन पर बैंक जिस दर से RBI को ब्याज देते हैं, उसे रेपो रेट कहा जाता है। यह अर्थव्यवस्था के सबसे अहम फैक्टर्स में से एक होती है।