सरकार ने स्टारलिंक के लाइसेंस में देरी के एलन मस्क के दावे को किया खारिज
क्या है खबर?
भारत सरकार ने सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस शुरू करने की होड़ में गलत व्यवहार और एकाधिकार के स्टारलिंक के प्रमुख एलन मस्क के आरोपों को खारिज कर दिया है। सरकार ने अपनी नियामक प्रक्रिया पर लगाए गए आरोपों को बेबुनियाद और गलतफहमी पर आधारित बताया है। सूत्रों ने बताया कि स्टारलिंक भारत में सैटेलाइट कम्युनिकेशन सर्विस के लिए मंजूरी पाने वाली तीसरी कंपनी है और तीनों ही कंपनियों को अभी लाइसेंस का इंतजार है।
जवाब
5 साल के इंतजार का दावा झूठा बताया
सरकारी सूत्रों ने CNBC-TV18 को बताया कि कंपनी को ग्लोबल मोबाइल पर्सनल कम्युनिकेशंस बाय सैटेलाइट (GMPCS) सेवाओं और भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र (IN-SPACe) से जरूरी मंजूरी केवल 2 साल पहले ही मिली थी।
इस तरह उन्होंने मस्क के उस दावे को गलत बताया कि स्टारलिंक ने भारत सरकार की सभी जरूरतों को पूरा करने में 5 साल बिताए थे। सूत्रों ने इस दावे को पूरी तरह से झूठा बताया।
आवेदन
रिलायंस इंडस्ट्रीज ने नहीं किया आवेदन
सूत्रों ने साफ किया कि रिलायंस इंडस्ट्रीज ने अपने खुद के उपग्रह समूह (सैटेलाइट कॉन्स्टेलेशन) के लिए लाइसेंस के लिए आवेदन नहीं किया है।
सरकार का यह रुख स्टारलिंक के भारत में आने को लेकर उठ रहे सवालों के बीच सामने आया है।
सैटेलाइट इंटरनेट के मामले में न केवल सर्विस देने वाली कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा होती है, बल्कि इसमें सुरक्षा मंजूरी, स्पेक्ट्रम का आवंटन और विदेशी कंपनियों के नियंत्रण वाले संचार ढांचे की निगरानी जैसे पहलू शामिल हैं।
जवाब
आरोपों पर मंत्री ने दिया जवाब
मस्क ने एक पोस्ट में कहा था, "स्टारलिंक को 165 से ज्यादा देशों में लाइसेंस मिला हुआ है और इसने भारत सरकार के हर नियम और जरूरत को पूरा करने में 5 साल लगाए हैं तो फिर अभी तक लाइसेंस क्यों नहीं मिला?"
इसके बाद संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने साफ किया कि 3 ऑपरेटर्स- जियो सैटेलाइट कम्युनिकेशंस, भारती-समर्थित वनवेब और स्टारलिंक को लाइसेंस मिल गए हैं, लेकिन सर्विस शुरू करने से पहले तय शर्तों को पूरा करना होगा।
एकाधिकार
एकाधिकार के आरोपों को ठहराया गलत
मस्क के आरोपों पर संचार मंत्री ने कहा था कि भारत किसी भी सेक्टर में एकाधिकार की इजाजत नहीं देता है।
उन्हाेंन कहा, "मैं साफ कर देना चाहता हूं। भारत किसी भी सेक्टर में मोनोपॉली की इजाजत नहीं देता है और जहां तक सैटकॉम की बात है, अभी तक किसी एक लाइसेंसधारी को नहीं चुना गया है। एक और पार्टी लाइसेंस लेने में दिलचस्पी रखती है। अब उस पार्टी को प्रक्रिया का पालन करना होगा और वह पार्टी अमेजन है।"