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कच्चा तेल 110 डॉलर प्रति बैरल के करीब, क्यों देखने को मिल रही तेजी?
कच्चा तेल 110 डॉलर प्रति बैरल के करीब

कच्चा तेल 110 डॉलर प्रति बैरल के करीब, क्यों देखने को मिल रही तेजी?

Oct 14, 2026
11:24 am

क्या है खबर?

अंतरराष्ट्रीय बाजार में आज कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिली है। ब्रेंट क्रूड का भाव 106.58 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड 94.94 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। इस तेजी के बीच कच्चे तेल की कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल के स्तर की ओर बढ़ती दिख रही हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में आए इस बदलाव पर दुनियाभर के खरीदारों और कारोबारियों की नजर बनी हुई है।

#1

सऊदी अरब पर हमलों से बढ़ी आपूर्ति बाधित होने की आशंका

कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने की एक बड़ी वजह सऊदी अरब पर हुए नए हमले हैं।

यमन के हूती विद्रोहियों ने मंगलवार, 13 अक्टूबर को धाहरान में सऊदी अरामको की एक प्रशासनिक इमारत को निशाना बनाया। इस घटना में वहां थोड़ी आग लग गई। सऊदी अरब दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादक देशों में शामिल है।

ऐसे में उसके ऊर्जा ठिकानों पर हमलों से तेल के उत्पादन, भंडारण और निर्यात पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।

#2

होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की ढुलाई को लेकर चिंता

कीमतों में तेजी की दूसरी वजह होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाली आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता है।

यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्गों में से एक है। क्षेत्र में जहाजों पर हमलों और टैंकरों की आवाजाही को लेकर चिंता बनी हुई है। अगर इस रास्ते से तेल की ढुलाई प्रभावित होती है, तो बाजार में आपूर्ति घट सकती है।

जहाजों के बीमा और माल ढुलाई का खर्च बढ़ने से भी कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव पड़ सकता है।

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#3

भारत पर भी पड़ सकता है महंगे तेल का असर

भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से कच्चा तेल खरीदकर पूरा करता है।

ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहने से देश का आयात खर्च बढ़ सकता है। महंगे तेल का असर परिवहन, सामान के उत्पादन और दूसरी गतिविधियों की लागत पर भी पड़ सकता है, जिससे महंगाई बढ़ने का खतरा रहता है।

हालांकि, पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में बदलाव घरेलू मूल्य निर्धारण, करों और तेल कंपनियों के फैसलों पर निर्भर करेगा।

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