स्टिंग की बोतलों पर 'एनर्जी ड्रिंक' लिखने को लेकर विवाद, पेप्सिको को राहत नहीं
क्या है खबर?
दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को पेप्सिको को स्टिंग एनर्जी ड्रिंक के नए स्टॉक पर तुरंत राहत देने से इनकार कर दिया है। मामला उत्पाद पर 'एनर्जी ड्रिंक' शब्द के इस्तेमाल से जुड़ा है। अदालत ने विवाद को दोबारा एकल न्यायाधीश के पास भेजते हुए एक सप्ताह के भीतर फैसला देने को कहा है। पीठ ने स्पष्ट किया कि उसने मामले के गुण-दोष पर कोई राय नहीं दी है। कंपनी को उत्पादन पर लगी रोक हटने का इंतजार करना होगा।
विवाद
FSSAI के निर्देशों से शुरू हुआ विवाद
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने कुछ पेय पदार्थों पर 'एनर्जी ड्रिंक' शब्द के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाए थे।
इसके बाद 6 अक्टूबर को दिल्ली हाई कोर्ट के एकल न्यायाधीश ने पेप्सिको को पहले से तैयार स्टॉक बेचने की अनुमति दी, लेकिन नए स्टॉक के उत्पादन पर रोक लगा दी। कंपनी ने इस फैसले को चुनौती दी थी।
डिवीजन बेंच ने कहा कि पहले के आदेश में उत्पादन रोकने के कारण स्पष्ट नहीं किए गए थे।
सवाल
रेड बुल और कैंपा के मामलों में भी उठे सवाल
FSSAI ने रेड बुल, स्टिंग, एड्रेनालाईन रश, मॉन्स्टर और कैंपा एनर्जी जैसे पेय पदार्थों पर 'एनर्जी ड्रिंक' शब्द के इस्तेमाल को लेकर नोटिस जारी किए थे।
29 सितंबर को दिल्ली हाई कोर्ट ने रेड बुल को जारी नोटिस रद्द कर दिया था। अदालत ने कहा था कि नियामक को आदेश देने से पहले कंपनी को अपना पक्ष रखने का मौका देना चाहिए था।
कैंपा एनर्जी के मामले में बिना कारण बताओ नोटिस दिए आदेश जारी करने पर सवाल उठे थे।
चिंता
पेप्सिको ने कारोबार पर असर पड़ने की जताई चिंता
पेप्सिको ने पहले अदालत में कहा था कि नए स्टॉक के उत्पादन पर रोक से उसे गंभीर कारोबारी नुकसान हो सकता है।
कंपनी के मुताबिक, 31 जुलाई तक ऐसे लेबल वाली 49.2 करोड़ बोतलें और 2.6 करोड़ कैन बाजार में मौजूद थे। FSSAI ने कहा था कि खाद्य श्रेणी तय करने वाली व्यवस्था का इस्तेमाल उत्पाद के नाम या लेबल के रूप में नहीं किया जा सकता।
ऊर्जा या एकाग्रता बढ़ाने जैसे दावों के लिए कानूनी आधार जरूरी है।