2G घोटाला

2G घोटाले को भारत के इतिहास का सबसे बड़ा आर्थिक घोटाला माना जाता था। इसका खुलासा 2010 में तब हुआ, जब महालेखाकार और नियंत्रक (CAG) ने अपनी रिपोर्ट में 2008 में किए गए स्पेक्ट्रम आवंटन पर सवाल उठाए थे। उस साल कंपनियों को नीलामी की बजाय 'पहले आओ पहले पाओ' के आधार पर लाइसेंस दिए गए थे। CAG की रिपोर्ट के मुताबिक, इससे देश के खजाने को 1.76 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। इस घोटाले में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का नाम भी उछला था। हालांकि, 2017 में दिल्ली की एक अदालत ने घोटाले में आरोपी 14 लोग और तीन कंपनियों को बरी कर दिया था। अदालत को इनके खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला।

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