अफगानिस्तान में IS के साथ मिलकर काम कर रहा लश्कर-ए-तैयबा

दुनिया

23 Jul 2019

अफगानिस्तान: पाकिस्तानी सेना की लश्कर-ए-तैयबा के साथ मिलकर भारतीय और अमेरिकी संपत्तियों पर हमले की योजना

आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) अफगानिस्तान में इस्लामिक स्टेट (IS) के साथ मिलकर काम कर रहा है और उसने पाकिस्तानी सेना के साथ मिलकर अफगानिस्तान में भारत और अमेरिका के हितों पर हमले की योजना तैयार कर ली है।

ये खबर ऐसे समय पर आई है, जब आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान वैश्विक दवाब का सामना कर रहा है और फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FAFT) में ब्लैकलिस्ट होने से बचने के लिए उसने LeT प्रमुख हाफिज सईद को गिरफ्तार किया है।

खुफिया बैठक

अफगानिस्तान में हुई पाकिस्तानी सेना, ISI और लश्कर आतंकियों की बैठक

अंग्रेजी अखबार 'हिंदुस्तान टाइम्स' ने भारत और अमेरिका के खुफिया अधिकारियों और राजनयिक सूत्रों के हवाले से छापी रिपोर्ट में ये सारी बातें बताई हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, हाल ही में अफगानिस्तान के कुनार प्रांत के दंगम जिले के जाबा इलाके में LeT आतंकवादियों और पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसी ISI की एक टीम की बैठक हुई, जिसमें LeT को भारतीय और अमेरिकी संपत्ति को निशाना बनाने को कहा गया है।

आतंकी गठजोड़

LeT को IS का भी साथ हासिल

अधिकारियों के अनुसार, LeT आतंकवादियों को अलग-अलग तरीके के हमले करने को कहा गया है, जिसमें पाकिस्तान से आए आत्मघाती हमलावर भी शामिल हैं।

उन्होंने बताया कि LeT को IS का समर्थन भी हासिल है और वह उसके साथ मिलकर काम कर रहा है।

अभी तक LeT अफगानिस्तान में कोई भी सीधा हमला करने से बचता रहा है, लेकिन विदेशी और अफगानी बलों पर हमले के लिए ये अलकायदा और तालिबान को सहायता प्रदान करता है।

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नोटिफाई करें

गतिविधियों में हाफिज सईद का बेटा शामिल

अधिकारियों ने बताया, "अफगानिस्तान में LeT की उपस्थिति तेजी से बढ़ रही है। हालिया जानकारी के अनुसार, हाफिज सईद का बेटा तल्हा सईद अफगानिस्तान के ऑपरेशन मामलों में बेहद दिलचस्पी ले रहा है।"

योजना

"इस्लामी जीत" का श्रेय लेना चाहता है LeT

रिपोर्ट के अनुसार, LeT के अफगानिस्तान पर ध्यान केंद्रित करने के पीछे वैचारिक से ज्यादा रणनीतिक कारण हैं। वो अपने लड़ाकों के लिए सुरक्षित ठिकाने बनाना चाहता है।

उसका विश्वास है कि अफगानिस्तान में तालिबान मजबूत स्थिति में हैं और वह "इस्लामी जीत" का श्रेय लेना चाहता है।

उसके लड़ाके आसानी से सीमा को पार कर पा रहे हैं और कुनार, नंगरहार और नूरिस्तान में उनकी उपस्थिति बढ़ रही है।

पाकिस्तान से मदद

पेशावर के मदरसे कर रहे LeT की मदद

पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी शहर पेशावर के कई मदरसे अफगानिस्तान में LeT की मदद कर रहे हैं और आतंकियों की भर्ती में योगदान देते हैं।

अधिकारियों ने ये भी बताया कि जैश-ए-मोहम्मद के अफगानी तालिबान के साथ हमेशा अच्छे संबंध रहे हैं और उसने अफगानिस्तान में अपनी गतिविधियां बढ़ा दी हैं।

उसके लड़ाके तालिबान के नेतृत्व में लड़ रहे हैं। इन लड़ाकों में पाकिस्तान के पंजाब प्रांत से आए आत्मघाती हमलावर भी शामिल हैं।

अन्य रिपोर्ट

पेंटागन और UN की रिपोर्ट में भी हुआ था समान दावा

इससे पहले अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन और संयुक्त राष्ट्र (UN) पैनल की रिपोर्ट्स में भी अफगानिस्तान में LeT आतंकियों की मौजूदगी की बात कही गई थी।

पेंटागन की रिपोर्ट में अफगानिस्तान में LeT आतंकियों की संख्या 300 बताई गई है। जबकि UN की रिपोर्ट के अनुसार, केवल कुनार और नंगरहार प्रांत में ही LeT के 500 लड़ाके सक्रिय हैं।

इसमें ये भी कहा गया है कि LeT तालिबान और हक्कानी नेटवर्क को लड़ाके, हथियार और पैसे की मदद देता है।

गठजोड़ की पुष्टि

अफगानिस्तान में मारा गया था कश्मीर में IS के लिए भर्ती करने वाला आतंकी

हाल ही में हुई एक घटना इस आतंकी गठजोड़ की पुष्टि करती है।

कश्मीर में IS के लिए भर्ती करने वाला आतंकी कमांडर हुजैफा अल बाकिस्तानी 18 जुलाई को अफगानिस्तान में एक ड्रोन हमले में मारा गया था।

हुजैफा IS से पहले LeT का सदस्य रहा था।

अफगानिस्तान में उसकी मौजूदगी से पाकिस्तान के आतंकी संगठनों के सदस्यों को IS से जुड़ने के लिए जम्मू-कश्मीर और अफगानिस्तान भेजने में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के हाथ की पुष्टि हुई थी।

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