व्यक्ति के घर से बरामद हिरण, अजगर और सियार

अजब-गजब

03 Jul 2019

व्यक्ति के घर से बरामद हिरण, अजगर और सियार जैसे जानवर, कहा- यह मेरा निजी चिड़ियाघर

अक्सर जब आप चिड़ियाघर में जाते होंगे, तो आपको वहाँ तरह-तरह के जानवर देखने को मिलते होंगे।

लेकिन अगर आपको जंगली जानवर बड़ी संख्या में किसी के घर के बाड़े में दिख जाएँ, तो यक़ीनन आपको हैरानी होगी।

हाल ही में छत्तीसगढ़ के धमतरी से 30 किमी को दूरी पर स्थित रतावा गाँव में वन विभाग ने छापा मारकर एक व्यक्ति के घर से हिरण, सियार, अजगर जैसे जानवर बरामद किए हैं।

आइए जानें पूरी घटना।

घटना

बड़े-बड़े पिंजरों में बंद थे जानवर

बता दें कि छापे के दौरान अधिकारियों को व्यक्ति के घर से हिरण के दो बच्चे, दो सियार, दो अजगर और छह तोते मिले।

हंसराज देव नाम के व्यक्ति ने इन जानवरों को अपने बाड़े में बड़े-बड़े पिंजरे बनाकर रखा हुआ था।

जब उससे इस बारे में पूछा गया तो हंसराज ने कहा कि यह उसका निजी चिड़ियाघर है।

इसके लिए उसने वन्य जीव संरक्षण एवं पर्यावरण सुरक्षा समिति ग्राम रतवा के नाम से संचालित चिड़ियाघर के दस्तावेज़ भी दिखाए।

जंगली जानवर

दो साल पहले भी हंसराज के पास से ज़ब्त किए गए थे जानवर

दो साल पहले भी हंसराज के पास से ज़ब्त किए गए थे जानवर

हंसराज ने आगे बताया कि वो बीमार जानवरों का इलाज भी करता है। वन विभाग ने गहन पूछताछ के बाद हंसराज को छोड़ दिया। हालाँकि, उसके कुछ दस्तावेज़ ज़ब्त किए गए हैं, जिसकी जाँच चल रही है।

जाँच की रिपोर्ट आने के बाद ही हंसराज के ऊपर आगे की कार्यवाई की जाएगी।

आपको जानकार हैरानी होगी कि बिरगुडी रेंजर सोनेसिंह ने बताया कि दो साल पहले भी हंसराज के पास से बड़ी संख्या में वन्य जीव ज़ब्त किए गए थे।

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सूचना

मुखबिर से मिली थी DFO को सूचना

ख़बरों के अनुसार, रविवार देर रात DFO अमिताभ वाजपेयी को मुखबिर से सूचना मिली कि रतवा के हंसराज ने पिंजरे में कई वन्य जीवों को क़ैद करके रखा है।

सुबह 07:00 बजे वन विभाग के अधिकारी मौक़े पर पहुँचे और उन्हें हंसराज के बाड़े में सभी जानवर क़ैद मिले।

पूछताछ में हंसराज ने बताया कि वो जंगल से भटके घायल और बीमार जानवरों का इलाज करते हैं और ठीक हो जानें के बाद उन्हें वापस जंगल में छोड़ देते हैं।

कानून

दोषी पाए जानें पर हो सकती है इतने साल की सज़ा

दोषी पाए जानें पर हो सकती है इतने साल की सज़ा

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम के तहत किसी भी वन्य जीव को क़ैद में रखने या उन्हें जान से मारने पर दो से सात साल की सज़ा का प्रावधान है।

वाइल्ड लाइफ़ एक्ट 1991 के अनुसार, शेर, चीता, भालू, हिरण, कोटरी और साँप को शेड्यूल-1 में रखा गया है। यानी ये जानवर बहुत महत्वपूर्ण हैं।

इन जीवों को कोई भी संस्था अपने कब्जे में नहीं रख सकती है।

सीधे गिरफ़्तार कर कोर्ट में केस दाख़िल करने का है नियम

जानकारी के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति शेड्यूल-1 में सूचित वन्य जीवों में से किसी भी जीव को अपने कब्जे में रखता है, तो पकड़े जाने पर सीधे गिरफ़्तार कर कोर्ट में केस दाख़िल करने के नियम है।

चिड़ियाघर

निजी चिड़ियाघर के बारे में क्या हैं नियम?

वन विभाग के विशेषज्ञों के अनुसार, कोई भी व्यक्ति या निजी संस्था अपना निजी चिड़ियाघर नहीं बना सकता है।

केवल यही नहीं, राज्य सरकारों को भी चिड़ियाघर खोलने के लिए सेंट्रल ज़ू अथॉरिटी से चिड़ियाघर खोलने की अनुमति लेनी पड़ती है।

सेंट्रल ज़ू अथॉरिटी ने चिड़ियाघर को लेकर कई कड़े नियम बनाएँ हैं। उन नियमों को पूरा करने के बाद ही राज्य सरकारों को चिड़ियाघर खोलने की अनुमति दी जाती है।

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