कतर बनाम भारत: मुकाबले से निकले ये निष्कर्ष

खेलकूद

11 Sep 2019

'यह भारतीय फुटबॉल के उदय का समय', कतर बनाम भारत मुकाबले से निकलने वाले निष्कर्ष

भारतीय फुटबॉल टीम ने बीती रात कतर को गोलरहित ड्रॉ पर रोक दिया।

वैसे तो ड्रॉ से भारत को केवल 1 ही प्वाइंट मिला, लेकिन उन्होंने इसका जश्न जीत के रूप में मनाया क्योंकि एशियन चैंपियन को रोक लेना किसी जीत से कम नहीं है।

इस मुकाबले में भारतीय टीम ने काफी खूबसूरत खेल दिखाया और इस ड्रॉ मुकाबले से हमें ये निष्कर्ष मिले हैं।

मिडफील्ड

भारत को मिल गए हैं उनके बेस्ट मिडफील्डर्स

इगोर स्टिमाक के अंडर साहाल अब्दुल समाद और अमरजीत सिंह कियाम जैसे दो युवा खिलाड़ियों ने सबसे ज़्यादा प्रभावित किया है।

बीती रात समाद का प्रदर्शन बेहद शानदार रहा और उन्हें अनिरुद्ध थापा तथा राउलिन बोर्गेस का बेहतरीन साथ मिला।

भविष्य के लिए भारतीय टीम समाद, अमरजीत और थापा को तैयार करना चाहेगी तो वहीं राउलिन के अनुभव का भी फायदा वे जरूर लेना चाहेंगे।

डिफेंस

टीम को इसी तरह करनी होगी डिफेंडिंग

टीम को इसी तरह करनी होगी डिफेंडिंग

ओमान के खिलाफ भारतीय टीम ने 80 मिनट तक 1-0 की बढ़त ले रखी थी, लेकिन 10 मिनट के अंदर ही वे 2-1 से मुकाबला गंवा बैठे।

इंटरकॉन्टिनेंट कप में तजाकिस्तान के खिलाफ 2-0 से आगे होने के बाद दूसरे हाफ में भारतीय टीम 4-2 से मुकाबला हार गई थी।

हालांकि, कतर के खिलाफ खिलाड़ियों ने डीप डिफेंडिंग की और अपने खेल में जरा भी गिरावट नहीं आने दी।

यह साफ़ है की भारत को इसी तरह करनी होगी डिफेंडिंग।

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नोटिफाई करें

सुनील छेत्री

क्या भारत के पास है छेत्री का विकल्प?

कतर के खिलाफ भारतीय तलिस्मन सुनील छेत्री मैदान में नहीं उतर सके और निश्चित रूप से उनकी कमी सबसे ज़्यादा खली।

भारतीय टीम ने भले ही बेहद डिफेंसिव खेल दिखाया, लेकिन उन्हें जब मौके मिले तो वे काउंटर करने में असफल रहे।

छेत्री की गैरमौजूदगी में भारतीय टीम का अटैक हल्का नजर आया और 35 साल के हो चुके छेत्री का विकल्प जल्द भारत को खोजना होगा।

उदय

क्या यह भारतीय फुटबॉल के उदय का समय?

पिछले 1 साल में यदि भारतीय फुटबॉल टीम के प्रदर्शन को देखा जाए तो ब्लू टाइगर्स ने काफी आगे का सफर तय किया है।

एशियन कप के लिए 8 साल बाद क्वालीफाई करने और फिर थाईलैंड को 4-1 से हराने तक भारतीय फुटबॉल का लेवल काफी ऊंचा हुआ है।

इस बार के क्वालीफायर से भी भारतीय फैंस को काफी उम्मीदें हैं और ऐसा लग रहा है कि यही भारतीय फुटबॉल के उदय का समय है।

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